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Rajasthan: कोटा के यशराज का कमाल, बिना मिट्टी 45 दिन में मशरूम की खेती से कमा रहे 80 हजार रुपये तक

Rajasthan: इस दौरान उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र कोटा के वैज्ञानिकों से संपर्क साधा और पुनः जनवरी 2022 में नई तकनीक के साथ मशरूम खेती के 500 बेग तैयार किये, और इस बार उनको 1000 किलो से ज्यादा मशरूम प्राप्त हुई। इस ऑयस्टर मशरूम को बाजार में बेचकर यश ने लागत निकालने के बाद भी 80,000/- रुपये से ज्यादा की कमाई की।

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नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा में 21 वर्षीय यशराज साहू ने अपने साथी राहुल मीणा की सहायता से बिना मिट्टी और बड़े खर्चे के हैंगिंग बैग के जरिये ही ऑयस्टर मशरूम की खेती से मात्र 45 दिन में शानदार मुनाफा कमा लिया। अब वो खुद की कंपनी डालकर मार्केट प्राइस से अधिक मूल्य पर लोगों से मशरूम उनको बेचने का ऑफर भी दे रहे ताकि वो ज्यादा से ज्यादा लोगों को मशरूम की खेती के व्यवसाय से जोड़ सके यश ने यह कमाल कर दिखाया खुद की मेहनत और लगन से। उन्होंने खुद ने 625 वर्ग फ़ीट के खाली पड़े प्लाट में मशरूम की खेती के लिए बांस, ग्रीन नेट, काली पॉलीथिन आदि से से स्ट्रक्चर तैयार किया। स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद उसमें रात्री 9 बजे से 1 बजे तक लगातार दस दिन तक बेग तैयार किये जिसमें 500 बेग में मशरूम की खेती की जा सके। अब वो इसको 500 बेग से बढाकर 1000 बेग तक करने का मन बना चुके है और इसी की तैयारी में है। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले यशराज का लक्ष्य स्कूल समय से ही सटीक था। उन्होंने स्कूलिंग के दौरान ही मशरूम के व्यवसाय में अपना भविष्य तय कर लिया और कक्षा 11 वीं में एग्रीकल्चर विषय चुनकर स्कूलिंग पूरी की तत्पश्चात स्नातक की पढाई के लिए बीएससी एग्रीकल्चर में दाखिला ले लिया। अभी वह बीएससी एग्रीकल्चर अंतिम वर्ष के विद्यार्थी है। बीएससी की पढाई के दौरान ही उन्होंने कृषि वन, देहरादून नामक संस्थान से 1 महीने तक मशरूम खेती की बारीकी जानी और फिर वर्ष 2018 में 50 बेग की खेती के रूप में प्रयोग करके देखा, उससे उनको 80 किलो मशरूम प्राप्त हुआ। उसे उन्होंने 100/- रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच दिया। उनका यह प्रयोग सफल रहा लेकिन कोरोना के कारण वो 2 वर्ष तक इसमें कुछ खास नहीं कर पाए।

इस दौरान उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र कोटा के वैज्ञानिकों से संपर्क साधा और पुनः जनवरी 2022 में नई तकनीक के साथ मशरूम खेती के 500 बेग तैयार किये, और इस बार उनको 1000 किलो से ज्यादा मशरूम प्राप्त हुई। इस ऑयस्टर मशरूम को बाजार में बेचकर यश ने लागत निकालने के बाद भी 80,000/- रुपये से ज्यादा की कमाई की। यश फ्रेश ऑयस्टर मशरूम को 100-150/-रुपये किलो तक बेचते है जबकि उसी मशरूम का सूखा पाउडर बनाकर 1500 से 2000/- रुपये प्रति किलो रिटेल में और 1000 से 1200/- रुपये प्रति किलो थोक में बेच देते है.100 किलो फ्रेश मशरूम से 10 किलो मशरूम पाउडर प्राप्त होता है। इस तरह यश 45 दिन की मशरूम खेती से ही 80,000/- से 1,00,000/-लाख रुपये तक कमा रहे है।

यश का कहना है कि “स्कूल के समय से ही मशरूम की खेती का मन बना लिया था इसलिए विशेषज्ञ से प्रशिक्षण लेकर घर में ही 3 वर्ष पहले 250 वर्ग फ़ीट खाली जगह पर स्ट्रक्चर तैयार कर 50 बेग मशरूम खेती का प्रयोग शुरू किया, जिसमे परिणाम उम्मीद अनुसार आये. इस वर्ष जनवरी में मित्र राहुल मीणा की सहायता से 500 बेग ऑयस्टर मशरूम खेती के तैयार किये। जिससे अच्छी फसल हुई। औसतन एक गुच्छे में 300-400 ग्राम ऑयस्टर मशरूम निकलता है लेकिन मेरे बेग के गुच्छों में 700 ग्राम तक मशरूम निकले. परिवार में कोई व्यपारी या किसान नहीं है इसलिए शुरू में थोड़ी घबराहट थी लेकिन अब 45 दिन की मेहनत से ही 80 हजार रुपये की कमाई देख घर वाले भी खुश है। अब आगे इसको बड़े स्तर पर करने कि तैयारी है।”

आगे यशराज बताते है कि 1000 किलो फ्रेश मशरूम के लिए 500 बेग तैयार करने पड़ते है जिसके लिए 600 किलो भूसा,100 किलो स्पान(बीज) 200/-रुपये की काली पॉलीथिन और 800/-रुपये की रस्सी की जरुरत होती है। ऑयस्टर मशरूम के लिए बांस का स्ट्रक्चर बनाया गया और ग्रीन नेट से उसको कवर किया गया, मशरूम बेग को 18 दिनों तक सूरज की रौशनी से बिलकुल दूर रखा गया और उसके बाद हल्के पानी का छिड़काव किया गया। मशरूम की खेती के लिए अनुकूल मौसम नवंबर से जनवरी माह होता है जिसमें तापमान 24 से 30 डिग्री तक रहता है। एक वर्ष में ऑयस्टर मशरूम की 6 से 7 क्रॉप तक लगाई जा सकती है। पहले यश को अपन मशरूम बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था लेकिन यूट्यूब,कृषि विज्ञानं केंद्र एवं कृष वन संस्थान की मदद से अब उनके पास अच्छी खासी मांग है इसलिए उन्होंने अब खुद की कंपनी डालकर इच्छुक लोगों के यहां प्लांट सेट करवाना शुरू कर दिया और उनका जो भी उत्पादन होता है उसको बाजार मूल्य से अधिक मूल्य पर खुद खरीद कर आगे मांग अनुसार बेच देते है। यश फ्रेश मशरूम का आचार भी बना कर बेचते है तो मशरूम पाउडर को पापड़, कैप्सूल एवं बिस्किट के रूप में भी बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे है।

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