कोरोना काल में योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि, पिछले साल के लगभग बराबर रही गेहूं खरीद

बता दें कि सरकार ने खाद्य विभाग को 55 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया था। इसके सापेक्ष 65 फ़ीसदी गेहूं की खरीद की गई। जबकि 2019 में भी खरीद का लक्ष्य इतना ही रखा गया था।

Written by: July 2, 2020 2:18 pm

नई दिल्ली। कोरोना काल में भी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक के बाद एक बड़ी सफलता हासिल कर रही है। इसी क्रम में कोरोना महासंकट के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने गेहूं खरीद को लेकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बता दें कि प्रदेश में 15 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू की गई थी। तब लॉकडाउन चल रहा था।

CM Yogi Adityanath

यूपी में सरकार द्वारा गेहूं खरीद की समय सीमा समाप्त हो गई है। 30 जून को गेहूं की खरीद खत्म हो गई। सरकारी केंद्रों पर 15 अप्रैल से 30 जून तक 35.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं की कुल खरीद खाद्य विभाग के द्वारा की गई।

लेकिन खास बात यह रही कि कोरोना महासंकट में भी पिछले साल के मुकाबले गेहूं की लगभग खरीद बराबर ही हुई है। जहां पिछले साल 37.04 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी। वहीं इस साल 35.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई। यानी पिछले साल के मुकाबले 1.29 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही कम खरीदा गया है।

बता दें कि सरकार ने खाद्य विभाग को 55 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया था। इसके सापेक्ष 65 फ़ीसदी गेहूं की खरीद की गई। जबकि 2019 में भी खरीद का लक्ष्य इतना ही रखा गया था। खरीद इसके सापेक्ष 67 फीसदी हुई थी। खाद्य विभाग के अधिकारी इस साल हुई गेहूं खरीद से काफी उत्साहित हैं। कारण यह है कि गेहूं की खरीद के समय पूरा लॉकडाउन चल रहा था। लॉकडाउन के बीच न सिर्फ खाद्य विभाग के अधिकारियों बल्कि किसानों के सामने भी मंडियों तक पहुंचने की बहुत दिक्कत थी।

Yogi adityanath

खाद्य आयुक्त मनीष चौहान ने बताया कि, ‘गेहूं खरीद के लक्ष्य को ज्यादा से ज्यादा पूरा करने के लिए 3 तरीके से खरीद की व्यवस्था बनाई गई। पहली व्यवस्था के तहत सरकारी मंडियों में खरीद की गई। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में खरीद केंद्र भी बनाए गए। तीसरी और सबसे अहम व्यवस्था मोबाइल खरीद केंद्रों (सचल खरीद गाड़ी) की तैयार की गई। इसके जरिए किसानों के घर या खलिहान से ही गेहूं की खरीद विभाग ने कर ली।’

उन्होंने कहा कि गेहूं बेचने के लिए उन्हें मंडियों या केंद्रों तक आने की मजबूरी नहीं रही। हालांकि कोरोना संकट की वजह से समस्याएं भी तमाम आई।