रामदेव की कोरोनिल पर रोक संबंधी वायरल हो रही पोस्ट का ये रहा सच

कोरोनिल के अप्रूवल को लेकर हाल ही में एक और भी पोस्ट वायरल की गई थी जिसमें ये दावा किया गया था कि ‘पतंजलि निर्मित कोरोनिल पर रोक लगाने वाले ‘डॉक्टर मुजाहिद हुसैन” को आयुष मंत्रालय ने हटा दिया।

Written by: June 28, 2020 7:16 pm

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर खबरों के प्रसार के साथ-साथ फेक खबरों की एंट्री भी समय-समय पर भ्रम की स्थिति पैदा करती रही है। एकबार फिर एक बड़ी खबर के पीछे फेक खबर चलाई जा रही है। बता दें कि ये खबरें योगगुरु बाबा रामदेव के पतंजलि द्वारा तैयार की गई कोरोनिल और आयुष मंत्रालय से जुड़ी हैं।

Ramdev

क्या है वायरल खबर-

वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि आयुष मंत्रालय में दवाईयों पर रिसर्च और अप्रूवल देने वाले साइंटिफिक पैनल के टॉप 6 साइंटिस्टों का नाम पढ़िए। असीम खान, मुनावर काजमी, खादीरुन निसा, मकबूल अहमद खान, आसिया खानुम, शगुफ्ता परवीन। इस पोस्ट में आगे लिखा है बाकी समझ जाइए कि रामदेव के कोरोनिल दवा पर रोक क्यों लगी थी, यही है सिस्टम जिहाद..? दीक्षा पांडेय नाम के यूजर अकाउंट से इस पोस्ट को शेयर किया गया।

PIB Diksha

सच क्या है-

न्यूजरूमपोस्ट ने इस खबर की पड़ताल की तो पता चला कि वायरल पोस्ट में जिन सभी के नाम लिखे हैं वो यूनानी Central Council for Research in Unani Medicine जो Ministry of AYUSH के अधीन है, उनके साइंटफिक पर्सनल की लिस्ट से लिए गए हैं। यानि इसका उनसे कोई संबंध नहीं है। यूनानी विभाग अलग है।

एक और अफवाह-

आपको बता दें कि कोरोनिल के अप्रूवल को लेकर हाल ही में एक और भी पोस्ट वायरल की गई थी जिसमें ये दावा किया गया था कि ‘पतंजलि निर्मित कोरोनिल पर रोक लगाने वाले ‘डॉक्टर मुजाहिद हुसैन” को आयुष मंत्रालय ने हटा दिया,आयुष को बदनाम करने वाले मुजाहिद हुसैन जैसे लोग ही सिस्टम में बैठ कर आयुर्वेद को बदनाम करते हैं। यह पोस्ट भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई लेकिन सच्चाई सामने आ गई।

PIB Pushpendra

 

इस पोस्ट को लेकर पीआईबी फैक्टचेक टीम ने जानकारी दी कि आयुष मंत्रालय के अनुसार हाल ही के दिनों में किसी भी डॉक्टर या चिकित्सा अधिकारी को किसी भी ड्यूटी या सेवा से नहीं हटाया गया है।

निष्कर्ष-

कोरोनिल को लेकर हटाए गए डॉक्टर और डॉक्टरों के पैनल संबंधी ये दोनों वायरल पोस्ट फेक हैं। खबरों की इस दुनिया में यह जरूर ध्यान रखें कि कहीं आप फेक खबर को प्रसार का साधन ना बन जाएं। लिहाजा पड़ताल के बाद ही खबरों को शेयर करें।