खुशखबरीः अब इस लाइलाज बीमारी की दवा खोजना का वैज्ञानिकों ने किया दावा, मरीज हुए ठीक

एक तरफ पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही है। और हर कोई इस घातक महामारी की वैक्सीन और दवा खोजने में लगा है। लेकिन इसी बीच ब्राजील से अच्छी खबर आई है कि एड्स जैसी लाइलाज बीमारी की दवा मिल गई है।

Avatar Written by: July 9, 2020 1:23 pm

साओ पाउलो। एक तरफ पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही है। और हर कोई इस घातक महामारी की वैक्सीन और दवा खोजने में लगा है। लेकिन इसी बीच ब्राजील से अच्छी खबर आई है कि एड्स जैसी लाइलाज बीमारी की दवा मिल गई है। ये दावा साओ पाउलो की फेडरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है।

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साओ पाउलो की फेडरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक दवाओं के एक मिश्रण के इस्तेमाल से ब्राजील का एक शख्स एड्स के वायरस से मुक्त हो गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, HIV पीड़ित को कई तरह की एंटीरेट्रोवायरल दवाओं और निकोटिनामाइड ड्रग का कॉम्बिनेशन दिया गया।

साथ ही उनका ये भी कहना है कि गोपनीयता कानून की वजह से मरीज का नाम सार्वजनिक नहीं कर सकते लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन को जल्द इसकी जानकारी दी जाएगी। टाइम मैगजीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों की टीम ने एड्स-2020 नाम की एक ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में ये दावा कर सबको चौंका दिया कि उन्होंने एक एड्स के मरीज को बिलकुल ठीक कर दिया है। शोधकर्ता डॉ. रिकार्डों डियाज ने बताया कि ब्राजील का ये शख्स को अक्टूबर 2012 में एचआईवी पॉजिटिव मिला था। ट्रायल में मरीज ने एड्स के इलाज के दौरान ली जाने वाली दवाएं बंद कर दी थीं। रिसर्च के दौरान मरीज को लंबे समय तक हर दो महीने पर एंटीरेट्रोवायरल दवाओं और निकोटिनामाइड ड्रग का कॉम्बिनेशन दिया गया। एक साल बाद जब मरीज का ब्लड टेस्ट किया गया तो रिपोर्ट निगेटिव आई। हालांकि मरीज के शरीर में वायरस को खत्म करने के लिए एंटीबॉडी का लेवल क्या था ये अभी नहीं बताया गया है।

मरीज ने भी बताया ‘ठीक हो गया हूं’

रिकवरी के बाद पहचान न जाहिर करने की शर्त पर मरीज का कहना है कि मुझे दूसरी जिंदगी मिली है। मैं वायरस मुक्त हो गया हूं, लाखों एचआईवी संक्रमित मरीजों के लिए उम्मीद है। यह जीवन एक गिफ्ट जैसा है। गौरतलब है कि अगर इस मामले की पुष्टि होती है तो यह एड्स का पहला मामला होगा, जहां बिना स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के एचआईवी को शरीर से बाहर निकाला गया।

इससे पहले स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से लंदन के एक इंसान का एड्स ठीक कर दिया गया था। शोधकर्ता एडम कास्टिलेजा के मुताबिक, मरीज जिंदा है और वायरस मुक्त है। यह साबित करता है कि एड्स का इलाज किया जा सकता है। फिलहाल विशेषज्ञ इस मामले पर लगातार नजर रख रहे हैं कि ब्राजील के शख्स में दोबारा वायरस मिलने का खतरा है या नहीं। यह आगे होने वाली टेस्टिंग में सामने आएगा।