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दुनिया

Edward Snowden: अमेरिका के खुफिया दस्तावेजों का खुलासा करने वाले एडवर्ड स्नोडेन को पुतिन ने दी रूस की नागरिकता, दोनों देशों में बढ़ सकती है तनातनी

यूक्रेन से जारी जंग और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों से तनातनी के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अमेरिकी सरकार के खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने वाले व्हिसिल ब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन को नागरिकता दे दी है। स्नोडेन ने साल 2013 में अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक कर अमेरिका की किरकिरी करा दी थी।

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vladimir putin and edward snowden

मॉस्को। यूक्रेन से जारी जंग और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों से तनातनी के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अमेरिकी सरकार के खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने वाले व्हिसिल ब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन को नागरिकता दे दी है। स्नोडेन ने साल 2013 में अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक कर तूफान ला दिया था। इन दस्तावेजों से पता चला था कि अमेरिका की सरकारें किन प्रतिद्वंद्वियों पर नजरदारी करती थीं और किन देशों में सत्ता पलटने के खेल में उनका हाथ था। पुतिन ने स्नोडेन के अलावा 71 अन्य लोगों को भी नागरिकता देने के आदेश पर सोमवार को दस्तखत किए हैं।

edward snowden

पुतिन के दस्तखत के साथ ही अब स्नोडेन आधिकारिक तौर पर रूस के नागरिक हो गए हैं। स्नोडेन के पास पहले से ही अमेरिका की नागरिकता है। स्नोडेन की उम्र 39 साल है। उन्होंने अमेरिका के एनएसए की तरफ से किए गए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कार्यों का खुलासा किया था। अमेरिकी अधिकारी लगातार कोशिश करते रहे कि एडवर्ड स्नोडेन को अपने देश लाकर आपराधिक मुकदमे का सामना कराया जाए, लेकिन इसमें उनको सफलता नहीं मिली थी। अब रूस का नागरिक बन जाने के बाद स्नोडेन को अमेरिका ले जाना वहां की सरकार के लिए बड़ा कठिन हो गया है। पुतिन के इस कदम से अमेरिका और रूस के बीच तनातनी और बढ़ने के भी आसार हैं।

joe biden and putin

रूस की नागरिकता मिलने के बाद एडवर्ड स्नोडेन की तरफ से अब तक कोई बयान नहीं आया है। स्नोडेन काफी पहले से रूस में अपनी पत्नी के साथ रह रहे हैं। उन्होंने साल 2020 में रूसी नागरिकता के लिए आवेदन दिया था। अब उनकी पत्नी भी रूस की नागरिकता के लिए आवेदन करने वाली है। पुतिन ने यूक्रेन में जंग के बाद से ही अमेरिका और पश्चिमी देशों को कई तरह से चोट पहुंचाने की लगातार कोशिश की है। उन्होंने तेल और गैस की खरीद के लिए भी डॉलर की जगह रूबल में पेमेंट लेने का आदेश दिया था। साथ ही अमेरिका और यूरोप के कई देशों पर प्रतिबंध भी लगाए थे। इन देशों ने भी रूस पर यूक्रेन युद्ध के कारण प्रतिबंध लगाए हैं।

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