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Pakistan: कराची में कादियानी मस्जिद पर तोड़फोड़, TLP ने ताबड़तोड़ हथौड़े बरसाए, सामने आया Video

Pakistan: ताजा हमला कट्टरपंथी राजनीतिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक यानि TLP ने किया है। पाकिस्तान में कट्टरपंथी किस कदर हावी है ये इस वीडियो से साबित होता है कि कराची में रहे इस हमले को रोकने वाला कोई भी नहीं है।

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Ahmadi mosque

नई दिल्ली। आतंकी और कट्टरपंथी सोच रखने वाला पाकिस्तान कंगाल हो चुका है। लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के तौर-तरीके में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। पाकिस्तान जो कि खुद को दुनिया में इस्लामिक देशों का सरदार समझता है। वहां तमाम इस्लाम की आवाज उठाने के दावे होते है उसी पाकिस्तान में मस्जिदों का विध्वंस किया जा रहा है। दरअसल कराची में कट्टरपंथियों ने अहमदी समुदाय के कादियानी मस्जिद में हमला किया और उसने तोड़ने की कोशिश की है। जिसका वीडियो सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि मस्जिद पर चढ़कर कट्टरपंथी संगठन ने ताबड़तोड़ हथौड़े बरसाए। ये पांचवीं अहमदी मस्जिद है जिस पर पिछले तीन महीनों में हमला किया गया है। ताजा हमला कट्टरपंथी राजनीतिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक यानि TLP ने किया है। इससे पहले सोमवार को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पेशावर में एक मस्जिद में हमला हुआ था जिसमें 100 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और कई जख्मी भी हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान ने ली थी।

Ahmadi mosque

बता दें कि 1974 में पाकिस्तान ने अहमदी समुदाय को गैर मुस्लिम घोषित कर दिया था। पाकिस्तान में इनको मुस्लिम तक नहीं माना जाता है। इतना ही नहीं अहमदिया समुदाय को हज के लिए सऊदी अरब जाने पर भी बैन है। इसके अलावा ये लोग न तो कोई उपदेश दे सकते है।वीडियो में देखा जा सकता है कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक के सदस्य एक-एक करके मस्जिद की ईंटों को तोड़ते दिखाई दे रहे है। पाकिस्तान में कट्टरपंथी किस कदर हावी है ये इस वीडियो से साबित होता है कि कराची में रहे इस हमले को रोकने वाला कोई भी नहीं है। सोशल मीडिया पर कादियानी मस्जिद पर हुए हमले का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

लेकिन सवाल ये उठता है कि शहबाज सरकार कहा है पाकिस्तानी सरकार इन पर कार्रवाई क्यों नहीं करती है। वहां की पुलिस खामोश क्यों है? सवाल शहबाज सरकार और उनकी पुलिस को इन लोगों का सपोर्ट है? क्या इसी तरह से अहमदी समुदाय के सारे मस्जिदों को तोड़ देंगे? क्या पाकिस्तान में अहमदी समुदाय का नामोनिशान खत्म कर दिया जाएगा?

 

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