देव गुरु बृहस्पति की महादशा ने पहुंचाया अरविंद केजरीवाल को बुलंदियों पर

अरविंद केजरीवाल की जन्म तिथि का विवरण गूगल से लिया हैं इसलिए मुझे ठीक से ज्ञात नहीं की यह जन्म तारिख कितनी हद तक ठीक है लेकिन फिर भी हम इसके आधार पर कुंडली का फलकथन करेंगे।

Written by: February 12, 2020 2:37 pm

अरविंद केजरीवाल की जन्म तिथि का विवरण गूगल से लिया हैं इसलिए मुझे ठीक से ज्ञात नहीं की यह जन्म तारिख कितनी हद तक ठीक है लेकिन फिर भी हम इसके आधार पर कुंडली का फलकथन करेंगे। अरविंद केजरीवाल की उपलब्ध जन्म कुंडली पर एक नजर डालते हैं कि इनका आने वाला समय इनके लिए कैसा रहेगा

Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal

नाम- अरविंद केजरीवाल

जन्म तिथि- 16 अगस्त 1968

जन्म स्थान- हिसार (हरियाणा)

जन्म समय- 23:46:00

जन्म लग्न- वृषभ,

चन्द्र राशि- वृषभ,

जन्म नक्षत्र- कृतिका चौथा चरण

आज हम यह जानने की कोशिश करेंगे की क्या अरविंद केजरीवाल की कुंडली में स्थित गृह उनको तीसरी दफा मुख्यमंत्री के पद तक कैसे पंहुचा दिया? जैसा कि हम सभी जानते हैं अरविंद केजरीवाल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान शुरू किया।

दिल्ली के अरविंद केजरीवाल की कुंडली में देव गुरु वृहस्पति की राशि मीन में अष्टम भाव में राहु बैठे हैं। जिसकी दशा में पहले उन्होंने प्रतिष्ठित संस्‍थान से मकैनिकल इंजीनियरिंग की और बाद में केंद्र सरकार में राजस्व अधिकारी बनें।

इसी राहु की महादशा में उन्हें 2006 में सूचना के अधिकार कानून के लिए जागरूकता पैदा करने के लिए मैगसेसे अवार्ड भी मिला। बाद में वर्ष 2008 में शुरू हुई गुरु की महादशा में वह सामाजिक कार्यों से और अधिक जुड़ते चले गए। वर्ष 2011-2012 में भ्रष्टाचार विरोधी जनांदोलनों की अगुवाई कर वह राजनीति में भी आए। गुरु में बुध की शुभ दशा में वह पहले दिसंबर 2013 में और बाद में फरवरी 2015 में फिर से दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।

arvind kejriwal

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि अरविंद केजरीवाल की लग्न कुंडली में वृषभ लग्न है और लग्न के स्वामी शुक्र की स्थिति चौथे भाव अथवा माता स्थान और राजनीती में राजनीती का स्थान है।। तो यह बात तो स्पष्ट है की लग्न के स्वामी की स्थिति राजनीती के हिसाब से अत्यधिक फलदायक हैं क्योकि राजीतिक करियर के लिए लग्न के स्वामी का चौथे घर से सम्बन्ध अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

अब यदि हम उनकी चालित कुंडली पर नजर डाले तो लग्न के स्वामी की स्थिति कुंडली के पाचवे भाव में है। यदि हम राजनीति के नज़रिए से देखे तो पाचवा भाव जनता का भाव है और किसी राजनीतिज्ञ के लिए लग्न के स्वामी का सम्बन्ध यदि पांचवे भाव से हो जाए तो यह जनता के साथ उस व्यक्ति का एक गहरा और विशेष सम्बन्ध दर्शाता है।

Delhi CM Arvind Kejriwal

अब क्योंकि राजनीति के करियर में चौथे भाव का इतना महत्व है तो इसके स्वामी पर भी नजर डालना अत्यधिक आवश्यक है, क्योकि चौथे भाव के स्वामी की स्थिति के आधार पर ही हम उस भाव की शक्ति का आकलन कर सकते है, लग्न कुंडली में चौथे भाव में सिंह राशी है और इसका स्वामी सूर्य अपने ही भाव में स्थित है।

सूर्य की स्थिति अपने ही भाव में अरविंद केजरीवाल के राजनीती करियर के लिए एक और वरदान है, क्योकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य सरकार का कारक है और सरकार में बने रहने के लिए सूर्य की मज़बूत स्थिति बेहद आवश्यक है।

सूर्य अपनी राशि में स्थित दसवे भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है, दसवा भाव कुंडली में सरकारी उच्च पद को दर्शता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि पांचवे भाव के स्वामी बुध की स्थिति चौथे भाव में शुक्र के साथ, जनता के साथ एक विशेष सम्बन्ध को दर्शाता है।

surya chandrama

अब हम चलते गुरु के पास, जन्म कुंडली के चौथे भाव में स्थित गुरु सूर्य की राशी में राजनीती के लिए एक विशेष योग का निर्माण करती है, वैसे भी गुरु की स्थिति राजनीती करियर और समाज सेवा के लिए विशेष है, ऐसे लोग इमानदार और समाजसेवक होते है।

ऐसे व्यक्तियों के पास यदि धन अर्जित करने के विशेष साधन भी हो तो भी वे उन साधनों का इस्तेमाल नहीं करते और एक साधरण जीवन व्यतीत करते है, हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की कुंडली में भी गुरु की स्थिती चौथे भाव में है और यही गुरु समाज सेवा और राजनीती में उठान देता है ।

गुरु और बुध दोनों शुभ ग्रह अरविंद केजरीवाल की जन्म कुंडली और नवांश दोनों में केंद्र में होकर उनको एक साफ-सुथरे जन-नेता की छवि देते हैं। गुरु और बुध चूंकि शिक्षा और स्वास्‍थ्‍य सेवाओं के कारक ग्रह हैं। इन दोनों ग्रहों के प्रभाव के कारण केजरीवाल ने अपने मुख्यमंत्री रहते इन दोनों क्षेत्रों में सरकारी बजट बढ़ाकर बड़े विकास कार्य किए और इन्हें चुनाव का मुद्दा बनाया जो सफल रहा।

गुरु-चन्द्रमा की शुभ दशा ने तीसरी बार बनाया मुख्यमंत्री

वर्तमान में अरविंद केजरीवाल की कुंडली में चल रही गुरु-चंद्र-गुरु की विंशोत्तरी दशा ने उनको अप्रत्याशित जीत दिलाकर तीसरी बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया है। केजरीवाल की कुंडली में सबसे विलक्षण योग शनि और चंद्र बना रहे हैं जो भाग्य स्थान में साथ-साथ बैठे हैं। इस योग ने इनको समाज के गरीब तबके का लोकप्रिय नेता बनाया है।

Kejriwal win

जन्म कुंडली के चौथे भाव में स्थित गुरु सूर्य की राशी में राजनीती के लिए एक विशेष योग का निर्माण करती है, वैसे भी गुरु की स्थिति राजनीती करियर और समाज सेवा के लिए विशेष है, ऐसे लोग इमानदार और समाजसेवक होते हैं। ऐसे व्यक्तियों के पास यदि धन अर्जित करने के विशेष साधन भी हो तो भी वे उन साधनों का इस्तेमाल नहीं करते और एक साधरण जीवन व्यतीत करते है, हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की कुंडली में भी गुरु की स्थिती चौथे भाव में है और यही गुरु समाज सेवा और राजनीती में उठान देता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि अरविंद केजरीवाल की कुंडली में शुक्र लग्न का स्वामी है और चौथे भाव में मंगल, बुध, गुरु एवम सूर्य के साथ विराजमान है। ग्रहों की ये स्थिति उन्हें अति-आत्मविश्वासी एवम दूसरों पर हावी होने वाला बनाती है। उन्हें ज्यादातर झगड़ालू दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है।

kejriwal

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि अरविंद केजरीवाल की कुंडली के लग्न में (चौथे भाव में) गुरु, बुध और शुक्र जैसे 3 शुभ ग्रहों के योग के कारण उन्होंने अपनी राजनीति को शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी जैसे मूलभूत सुविधाओं को कम दामों में देने की लोकलुभावन नीति अपनायी। किन्तु हानि के 12वें घर में पड़े शनि के अशुभ योग के कारण उनकी पार्टी के कई प्रभावशाली नेता बेहद विवादास्पद झगड़ों के बाद उनको छोड़ कर जाते रहे।

अरविंद केजरीवाल की कुंडली में वर्तमान में गुरु में की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही है। चन्द्रमा नवम भाव में नवमेश मंगल के साथ परिवर्तन योग में है और साथ ही उस पर पंचमेश गुरु की दृष्टि है, जिसके कारण यह दो बड़े योगों का प्रभाव लिए हुए है।

इस दोहरे शुभ योग के प्रभाव से केजरीवाल अपनी उदार छवि के बलबूते बीजेपी और कांग्रेस की दोहरी चुनौती को मात देकर फिर एक बार दिल्ली प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। यदि हम केजरीवाल की मौजूदा दशाओं की बात करें तो उनकी गुरु की महादशा (17 अगस्त 2020 तक) में तथा राहु की अंतर दशा (17 अगस्त 2020 तक  ) तथा शुक्र का प्रत्यन्तर (02 मार्च 2020 तक) चल रही है।

Arvind Kejriwal

दोनों ही गृह उनको समाज सेवा तथा राजनीती की तरफ धकेल रहे है, यदि दिल्ली में 2020 में विधान सभा चुनाव होते है, तो उनकी कुंडली के अनुसार 90 % से अधिक कहा जा सकता है की वे तीसरी दफा मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे। दूसरी ओर भाग्य स्थान में शनि का होना यह भी दर्शाता कि वह लंबे समय तक सत्ता में बने रहेंगे। चन्द्रमा मंगल की राशि मेष में है और मंगल चन्द्रमा की राशि कर्क में है। जिस कारण एक अच्छा स्थान परिवर्तन योग भी अरविंद केजरीवाल की कुंडली में बन रहा है। इन तीन बड़े योगों के बल पर वह अब तीसरी बार दिल्ली की सत्ता पाने जा रहे हैं।