चंद्रयान-2

चंद्रयान के विक्रम लैंडर से संपर्क करने की कोशिश के रास्ते मे एक बड़ी काली रात आने वाली है। हालांकि इसरो ने अभी उम्मीद ही नहीं छोड़ी हैं। मगर अब इन उम्मीदों के पास सिर्फ 180 मिनट का वक्त है। इसके बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की भौगोलिक स्थिति विक्रम लैंडर के खिलाफ जा सकती है।

चंद्रयान मिशन-2 में चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करते वक्त इसरो का विक्रम लैंडर से संपर्क टूट गया था। यह संपर्क नई जानकारी के मुताबिक चांद की सतह से 335 मीटर की दूरी पर टूट गया था। फिलहाल अभी इसरो विक्रम से संपर्क करने की कोशिश में लगा हुआ है।

मोहाली(पंजाब)। नोबेल पुरस्कार विजेता सर्जे हरोशे ने बुधवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के वैज्ञानिक निश्चित ही...

ग्राफ में देखा जा सकता है कि चांद की सतह से 335 मीटर की ऊंचाई पर हरे रंग का एक डॉट बन गया और विक्रम से संपर्क टूट गया। इसके बाद विक्रम लैंडर चांद की सतह से टकरा गया। हालांकि, इसरो वैज्ञानिक विक्रम से संपर्क साधने में लगे हैं।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने मंगलवार को एक बार फिर कहा कि चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने मून लैंडर विक्रम का पता लगा लिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ट्वीट किया, "चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर का पता लगा लिया है, लेकिन अभी तक उससे संपर्क नहीं हो सका है।"

मिशन चंद्रयान-2 को लेकर देशभर के लोग थोड़ मायुस हुए थे लेकिन ऑर्बिटर ने अब विक्रम लैंडर के बारे में पता लगा लिया है। ऑर्बिटर ने थर्मल इमेज कैमरा से विक्रम लैंडर की तस्वीर ली है जिसके बाद विक्रम लैंडर के लोकेशन के बारे में इसरो को पता चल पाया है।

भारत जापान चंद्र मिशन की योजना पहली बार 2017 में सार्वजनिक की गई थी। इसके बाद साल 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान हुए सरकारी विचार विमर्श का यह हिस्सा भी थी। चन्द्रयान-2 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने की सूरत में इस प्लानिंग में और भी मदद मिलती।

पाकिस्तान की पहली एस्ट्रोनॉट नमीरा सलीम ने कहा कि, 'चंद्रयान-2 मिशन दक्षिण एशिया के लिए अंतरिक्ष के क्षेत्र में लंबी छलांग है। यह सिर्फ दक्षिण एशिया के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री के लिए गर्व का विषय है।'

मिशन चंद्रयान-2 को लेकर इसरो ने बड़ा बयान दिया है। इसरो ने कहा है कि चंद्रयान-2 ने अपने मिशन का 95 फीसदी लक्ष्य हासिल किया है।