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Jama Masjid turn after Gyanvapi:  ज्ञानवापी के बाद अब जामा मस्जिद की बारी? मस्जिद के नीचे हिंदू देवी-देवताओं की मूर्ति…!!

Jama Masjid turn after Gyanvapi: आपको बताते चलें कि उक्त पत्र ऐसे समय में लिखा गया है, जब वर्तमान में ज्ञानवापी मस्जिद का मसला काफी सुर्खियों में है। बीते दिनों उक्त मसले को लेकर पांच महिला याचिकाकर्ताओं की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराए जाने की मांग की गई थी। वहीं, अब तीन दिनी सर्वे के उपरांत हिंदू पक्ष की ओर से कई ऐसे साक्ष्य संग्रहित होने के दावे किए जा रहे हैं, जिससे वहां कालांतर में मंदिर स्थित होने की पुष्टि होती है।

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नई दिल्ली। क्या हुआ। चौंक गए न आप। उपरोक्त सुर्खी को पढ़ने के उपरांत आपके जेहन में बेशुमार सवालों ने शोर मचाना शुरू कर दिया होगा। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर क्या हो गया। अभी तो ज्ञानवापी मस्जिद का मसला नहीं सुलझा और अब एक ऐसा ही मसला प्रकाश में आ गया है। आखिर क्या है पूरा माजरा। यही जानने के लिए बेताब हो रहे हैं न आप… तो चलिए अब आपको पूरा माजरा तफसील से बताते हैं।

जानिए पूरा माजरा

दरअसल, हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राजधानी दिल्ली में स्थित जामा मस्जिद का सर्वे कराने का आग्रह किया है। हिंदू महासभा ने दावा किया है कि मस्जिद के नीचे हिंदू देवी-देवताओं की मूर्ति है। लिहाजा सच को सामने लाने के लिए सर्वेक्षण कराया जाए। हिंदू पक्षों ने दावा किया है कि आज भी जामा मस्जिद में हिंदू देवी- देवताओं की मूर्तियां हैं। हालांकि, इससे पहले भी जामा मस्जिद में देवी-देवताओं की मूर्ति होने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन उपरोक्त सच को जाहिर करने के लिए कभी विधिवत रूख अख्तियार नहीं किया गया था। लेकिन इस बार इसे लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया है, जिसमें मस्जिद का सर्वे कराए जाने की मांग की जा रही है। लेकिन अभी तक इस मसले को लेकर प्रधानमंत्री की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसी स्थिति में अब देखना होगा कि पीएम मोदी की तरफ से उक्त मसले को लेकर क्या कुछ प्रतिक्रिया सामने आती है।

आपको बताते चलें कि उक्त पत्र ऐसे समय में लिखा गया है, जब वर्तमान में ज्ञानवापी मस्जिद का मसला काफी सुर्खियों में है। बीते दिनों उक्त मसले को लेकर पांच महिला याचिकाकर्ताओं की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराए जाने की मांग की गई थी। वहीं, अब तीन दिनी सर्वे के उपरांत हिंदू पक्ष की ओर से कई ऐसे साक्ष्य संग्रहित होने के दावे किए जा रहे हैं, जिससे वहां कालांतर में मंदिर स्थित होने की पुष्टि होती है। वहीं सर्वे के आखिरी दिन यानी की तीसरे दिन मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग होने के दावे हिंदू पक्ष की ओर से किए गए हैं, लेकिन मुस्लिम पक्ष इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। अब कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट दाखिल होनी है। हालांकि, सर्वे रिपोर्ट कल ही दाखिल होनी थी, लेकिन अधिवक्ता विशाल ने सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने  से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दो दिन की और मोहलत मांगी है। कोर्ट ने उन्हें मोहलत दे दी है। अब देखना होगा कि रिपोर्ट दाखिल होने के उपरांत कोर्ट की तरफ से उक्त संदर्भ में क्या कुछ टिप्पणी की जाती है। वहीं, कल वाराणसी कोर्ट ने उक्त संदर्भ में सुनवाई करते हुए कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सर्वे मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया और मस्जिद से संदर्भित सूचनाओं को मीडिया में सार्वजनिक करते रहे।

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जिस पर अधिवक्ता विशाल ने पहले तो आपत्ति जताई, लेकिन जब अजय ने उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया, तो उन्होंने कोर्ट में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कर दी। वहीं, अजय ने खुद के हटाए जाने पर विशाल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उन पर विश्वास किया था। लेकिन बदले में उन्हें धोखा मिला। उधर, इस पूरे मसले को लेकर जमकर राजनीति होती हुई दिख रही है। आप यह कह सकते हैं कि ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर हिंदुस्तानी राजनीति दो गुटों में बंट चुकी है। एक ऐसा गुट जो ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर अपने तर्क दे रहा है, तो दूसरा ऐसा गुट जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है। अब ऐसी स्थिति में यह पूरा मसला आगे चलकर क्या कुछ रुख अख्तियार करता है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। तब तक के लिए आप देश-दुनिया की तमाम बड़ी खबरों से रूबरू होने के लिए पढ़ते रहिए। न्यूज रूम पोस्ट.कॉम

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