बाबरी विध्वंस मामले में कोर्ट कल सुनाएगा फैसला, सभी आरोपियों को अदालत में रहना जरूरी

Ayodhya : बाबरी मस्जिद(Babari Masjid) को राम मंदिर(Ram Mandir) आंदोलन के बाद 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या(Ayodhya) में जुटे लाखों कारसेवकों ने ढहा दिया था। बाबरी मस्जिद स्ट्रक्चर गिराने के बाद उसी स्थान पर एक अस्थाई राम मंदिर का निर्माण कर दिया गया और पूजा पाठ शुरू कर दी गई।

Avatar Written by: September 29, 2020 8:31 am
Babari Masjid

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त तो हो गया और इसकी तैयारियां भी जोरों पर हैं लेकिन इस खुशी के बीच अब बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 30 सितंबर को फैसला आना है। ऐसे में राम मंदिर निर्माण की खुशी पर काले बादल जरूर छाए हुए हैं। बता दें आने वाले 48 घंटे सभी आरोपियों के लिए बेहद मुश्किल हैं। विवादित ढांचे के विध्वंस प्रकरण का फैसला कल यानि 30 सितंबर को आएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सीबीआई कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर 2 सितंबर से अपना निर्णय लिखवाना शुरू कर दिया। इसपर फैसला क्या आएगा, इसको लेकर हर कोई कयासों के गोते लगा रहा है। गौरतलब है कि इस मामले में भाजपा, शिवसेना व विहिप के वरिष्ठ नेताओं के साथ साधु-संत भी आरोपित हैं। 28 साल बाद इस मामले में कोर्ट अपना फैसला सुना रही है। इस मामले में 18 आरोपियों की अबतक मौत हो चुकी है तो कुछ अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में हैं। ऐसे में दिलचस्प होगा कि आखिर कोर्ट से उन्हें सजा मिलेगी या राहत।

Babari Mosque

बता दें कि इस मामले में 32 में से कुछ आरोपी जैसे जिनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे आदि लोग कोरोना महामारी और उम्र का हवाला देते हुए अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़ने की मांग सकते हैं।

बता दें कि बाबरी मस्जिद को राम मंदिर आंदोलन के बाद 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जुटे लाखों कारसेवकों ने ढहा दिया था। बाबरी मस्जिद स्ट्रक्चर गिराने के बाद उसी स्थान पर एक अस्थाई राम मंदिर का निर्माण कर दिया गया और पूजा पाठ शुरू कर दी गई। इस मामले में उसी दिन अयोध्या पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर कारसेवकों के खिलाफ दर्ज की गई। जिसका नंबर 197/1992 था. इस एफआईआर में कारसेवकों पर डकैती, लूटपाट, मारपीट करना, चोट पहुंचाना, सार्वजनिक इबादत गाह को क्षतिग्रस्त करने और धार्मिक वैमनस्यता भड़काने के आरोप लगाए गए थे।

वहीं इस मामले में दूसरी FIR संख्या 198/1992 में भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कुल आठ नेताओं और पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया था। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने मंच पर खड़े होकर भड़काऊ भाषण दिया था। इन लोगों में विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन महासचिव अशोक सिंघल, बजरंग दल नेता विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती, विष्णु हरि डालमिया, बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, गिरिराज किशोर के नाम थे।

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इसके अलावा बाबरी विध्वंस घटना के दिन दर्ज हुए मुकदमे अपराध संख्या 197 और 198 एक दूसरे से जुड़े हुए थे, इसलिए सीबीआई ने दोनों को जोड़ते हुए 5 अक्टूबर 1993 को संयुक्त चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में ही बालासाहेब ठाकरे, चंपत राय, महंत नृत्य गोपाल दास, महंत धर्मदास, पवन पांडे, संतोष दुबे और कल्याण सिंह समेत कुछ और लोगों के नाम शामिल किए गए थे।