Uttar Pradesh: कानपुर में पिछड़ी जाति के परिवार पर हमला, प्रशासन सख्त, 3 गिरफ्तार, लगा रासुका

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में लगातार दंगा (Riot) भड़काने की साजिश की जा रही है। प्रशासन की तरफ से इस तरह की वारदातों से सख्ती से निपटा भी जा रहा है। अब कानपुर (Kanpur) के एक गरीब पिछड़े परिवार पर मामूली विवाद के बाद कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया।

Avatar Written by: November 16, 2020 3:41 pm
Kanpur Riot

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार दंगा भड़काने की साजिश की जा रही है। प्रशासन की तरफ से इस तरह की वारदातों से सख्ती से निपटा भी जा रहा है। अब कानपुर के एक गरीब पिछड़े परिवार पर मामूली विवाद के बाद कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया। इन कट्टरपंथियों के निशाने पर इस बार कानपुर के चकेरी का गरीब निषाद परिवार आया। पानी के छींटे पड़ जाने के बाद जबरन इस मामले पर विवाद पैदा किया गया और आरोपियों ने निषाद परिवार के एक सदस्य की हत्या कर दी। इस पूरे मामले में बड़ी संख्या में जुटे उपद्रवियों की साजिश थी कि कानपुर समेत पूरे प्रदेश को सांप्रदायिक दंगों की आग में झोंक दिया जाए। इस पर कानपुर प्रशासन तत्काल हरकत में आई और कार्रवाई करते हुए कुछ घंटों के भीतर ही उपद्रवियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। इस पूरे मामले में योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ रासुका के तहत मुकदमा दर्ज किया है। हत्या और मारपीट में शामिल 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। वहीं फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी भी की जा रही है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की पुलिस को उपद्रवियों को गिरफ्तार कर ऐसी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं जो भविष्य के लिए मिसाल बने। मुख्य‍मंत्री ने निषाद परिवार के सदस्य की मौत पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। साथ ही निषाद परिवार को तत्काल 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने के निर्देश भी अफसरों को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आला अफसरों को यह भी निर्देश दिया है कि यदि स्थानीय पुलिस, प्रशासन के स्तर पर किसी प्रकार की ढिलाई हुई तो उनके ख़िलाफ़ भी प्रभावी कार्रवाई की जाए।

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घटना दीवाली के त्यौहार के ठीक अगले दिन यानि रविवार के रात की है जब कानपुर के जाजमऊ इलाके के वाजिदपुर में सबकुछ सामान्य होने के बाद अचानक हिंसा और मारपीट शुरू हो गई। हुआ ये कि पानी के छींटे पड़ने के मामूली विवाद को कुछ कट्टरपंथियों ने सांप्रदायिक टकराव का रूप दे दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टेनरीकर्मी राम निषाद का बेटा पिंटू चप्पल बनाने का काम करता था। रविवार की रात पिंटू अपने बड़े भाई संदीप के साथ जा रहा था। इस दौरान पानी के छींटे पड़ने को लेकर गुमटी के पास खड़े अमान और उसके साथियों से मामूली कहासुनी के थोड़ी देर बाद तो मामला शांत हो गया। लेकिन कुछ देर बाद ही अमान अपने साथ दर्जनों की संख्या में उपद्रवियों को लेकर पहुंचा और ईंट, पत्थर और लोहे के रॉड से पिंटू और उसके परिवार पर हमला बोल दिया। इस दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने भी इसका विरोध करने की कोशिश की, लेकिन हिंसा पर उतारू कट्टरपंथियों ने पिंटू पर जबरदस्त तरीके से हमला कर उसे घायल कर दिया। पिंटू को अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। हालात को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

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कानपुर पुलिस ने मामले में सरफराज आलम पुत्र जाहिद हुसैन, मोहसिन पुत्र अब्दुल कलाम, मेराज पुत्र अनवर आलम को गिरफ्तार किया है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले में शामिल अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए कानपुर और आस पास के इलाकों में छापेमारी कर रही है।

यूपी को सांप्रदयिक दंगों की आग में झोंकने की साजिश जारी, राजनीतिक दल भी बन रहे इसका हिस्सा

दलितों और पिछड़ों पर हमलों के जरिये लगातार यूपी को सांप्रदायिक दंगों की आग में झोंकने की साजिश हो रही है। एनसीआर और पश्चिम यूपी में नाकाम हुए साजिशों के इस सिलसिले की आजमाई अब कानपुर के जरिये मध्य यूपी और पूर्वांचल में की जा रही है। हालांकि योगी सरकार भी इस साजिश को लेकर लगातार चौंकन्नी और सतर्क है।

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21 अक्टूबर को मुरादाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र निवासी पप्पूक वाल्मीकि को पशु चारा के लिए खल्ली खरीदने के दौरान जिलानी और मुजम्मिल नाम के दो युवकों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सार्वजनिक तौर से अपमानित किया और डरा धमका कर भगा दिया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

उन्नाव में दलितों के प्रति कट्टरपंथियों की नफरत सड़क पर दिखी। नाली साफ करने का पैसा मांग रहे दलित परिवार को कट्टरपंथियों ने घेर का पीटा और गांव छोड़ कर भाग जाने की धमकी दी। 11 अक्टूबर को लखीमपुर में कट्टरपंथियों का कहर दलितों पर टूटा। जिले की मितौली तहसील के खुर्रमनगर गांव के दलित रंजीत भार्गव को गांव के दबंग मोहम्मद लतीफ ने अपने एक दर्जन साथियों के साथ मिल कर पीटा। दबंगों ने रंजीत के घर पर हमला बोला, महिलाओं और बच्चों को लाठियों से पीटने के बाद घर में आग लगाकर सभी को जिंदा जलाने की कोशिश की।

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मेरठ के परीक्षित गढ़ में वसीम, बादल और शौकीन नाम के दबंगों ने 16 अक्टूबर की रात संदीप वाल्मीकि के घर हमला कर उसे व उसके परिवार को मारा पीटा, जातिसूचक गालियां देने के साथ ही कट्टरपंथियों ने पुलिस को सूचना देने पर जान से मारने की धमकी दी।

प्रदेश में दलितों, पिछड़ों पर बढ़ रहे हमलों को सुनियोजित साजिश के तौर पर देखा जा रहा है। दलितों पर हमले के जरिये जहां एक तरफ योगी सरकार को बदनाम करने का षडयंत्र रचा जा रहा है वहीं यूपी को सिलसिलेवार जातीय और सांप्रदायिक दंगों की आग में झोंकने की साजिश की जा रही है। जानकारों की मानें तो दलितों पर हमले के पीछे खुद का अस्तित्व तलाश रहे राजनीतिक दलों के साथ अपना राजनीतिक अस्तित्व खो चुकी राजनीतिक पार्टियां हैं। ऐसे दल जातीय और सांप्रदायिक संघर्ष में सियासी रोटी सेंकने में जुटे हैं।

उत्तर प्रदेश की विकास की गति रोकने और जातीय संघर्ष में झोंकने के षडयंत्र को नाकाम करने के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है। पुलिस अफसरों को ऐसे किसी भी कुचक्र का करारा जवाब देने और साजिशकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

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