मध्य प्रदेश बागी विधायकों से मिलने बेंगलुरु पहुंचे दिग्विजय सिंह को लगा कर्नाटक हाईकोर्ट से झटका, कोर्ट ने ख़ारिज की याचिका

बेंगलुरु में मध्य प्रदेश कांग्रेस के बागी विधायकों से मिलने पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को कर्नाटक हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें बुधवार को दिग्विजय ने बेंगलुरु में कांग्रेस के बागी विधायकों से मिलने से रोके जाने के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी

Written by: March 18, 2020 7:41 pm

नई दिल्ली। बेंगलुरु में मध्य प्रदेश कांग्रेस के बागी विधायकों से मिलने पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को कर्नाटक हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें बुधवार को दिग्विजय ने बेंगलुरु में कांग्रेस के बागी विधायकों से मिलने से रोके जाने के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि कर्नाटक पुलिस को आदेश दें कि मुझे बागी विधायकों से मिलने दिया जाए। अब कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऐसा कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया है।

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गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश में कांग्रेस से बागी हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायक 10 दिन से बेंगलुरु में हैं। फ्लोर टेस्ट को लेकर जारी घमासान के बीच कांग्रेस अब बागियों को मनाने की कोशिश में है। जिसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ सरकार के कुछ मंत्री भी बेंगलुरु पहुंच गए। लेकिन कर्नाटक पुलिस ने उन्हें रमादा होटल के बाहर ही रोक दिया। इसके बाद सभी कांग्रेस नेता सड़क पर धरने पर बैठ गए और लगातार वो विधायकों से मिलने के लिए पुलिस की मदद के लिए बोलते रहे।

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कमलनाथ ने कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई पर उठाये सवाल

बता दें कर्नाटक पुलिस ने दिग्विजय सिंह, कांतिलाल भूरिया समेत करीब 10 कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए दिग्विजय ने कहा- अब वे थाने में भूख हड़ताल करेंगे। उन्होंने विधायकों से मिलने से रोकने के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। वहीं, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पुलिस की कार्रवाई को हिटलरशाही बताया और पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल भी खड़े किये।

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कुछ सूत्रों के मुताबिक कांग्रेसी अपने पक्ष में बीजेपी के विधायकों को जुटाने की कोशिश में है। मगर यह बेहद मुश्किल लग रहा है। राज्यसभा चुनाव में यदि भाजपा के विधायक कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में क्रास वोटिंग करते हैं तभी भाजपा का खेल बिगाड़ सकता है। दोनों पार्टी व्हिप जारी कर चुकी है और ऐसी सूरत में क्रॉस वोटिंग करने वालों के खिलाफ पार्टियां कदम उठा सकती हैं। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कुल 3 सीटों के लिए 4 उम्मीदवार खड़े हैं। कांग्रेस और भाजपा की ओर से दो-दो उम्मीदवार सामने होने से यह तय हो गया है कि 26 मार्च को मतदान होगा। इसी समीकरण ने चुनावों को दिलचस्प बना दिया है।