भाजपा विधायक की अयोग्यता के मामले में गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में भाजपा के वरिष्ठ नेता पबुभा माणेक को राहत देने से मंगलवार को इंकार कर दिया। गुजरात हाई कोर्ट ने पिछले साल द्वारका सीट के इस विधायक को अयोग्य ठहरा दिया था।

Avatar Written by: June 16, 2020 7:18 pm

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में भाजपा के वरिष्ठ नेता पबुभा माणेक को राहत देने से मंगलवार को इंकार कर दिया। गुजरात हाई कोर्ट ने पिछले साल द्वारका सीट के इस विधायक को अयोग्य ठहरा दिया था।

Pabubha Manek BJP MLA Gujrat

प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना ने माणेक के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी लंबित याचिका में हाई कोर्ट के आदेश को स्थगित करने की मांग की थी।

माणेक ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और उस पर स्थगन की मांग की थी, क्योंकि वह इस महीने होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार होना चाहते थे। माणेक के वकील ने पीठ के समक्ष कहा कि यदि हाई कोर्ट के आदेश को स्थगित नहीं किया गया तो वह राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, और इसके साथ ही उन्होंने लंबित याचिका के निपटारे तक आदेश पर स्थगन देने का आग्रह किया।

Gujrat High court

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अप्रैल में निर्देश दिया था कि द्वारका विधानसभा सीट रिक्त न घोषित की जाए और अयोग्यता को चुनौती देने वाली माणेक का याचिका स्वीकार ली थी। लेकिन शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के 12 अप्रैल के आदेश को स्थगित नहीं किया था, जिसमें माणेक के निर्वाचन को खारिज कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने एक त्रुटिपूर्ण नामांकन फार्म जमा किया था। कोर्ट ने इस सीट पर उपचुनाव कराने के आदेश दे दिए थे।

Supreme-Court....

कांग्रेस उम्मीदवार मेरामण गोरिया ने 2017 के विधानसभा चुनाव में द्वारका सीट से माणेक की जीत को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। गोरिया ने कहा था कि माणेक ने एक त्रुटिपूर्ण नामांकन फॉर्म दाखिल किया था, लिहाजा उनकी जीत को रद्द किया जाना चाहिए। गोरिया ने कहा था कि नामांकन फॉर्म में निर्वाचन क्षेत्र का नाम और नंबर नहीं है, जो कि ’82-द्वारका’ है। माणेक इस सीट से सात बार विधायक रह चुके हैं।

हाई कोर्ट ने कहा, “जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 के प्रावधानों के तहत यह त्रुटि गंभीर प्रकृति की है।” हालांकि हाई कोर्ट ने गोरिया के उस आवेदन को स्वीकार नहीं किया कि उन्हें विजेता घोषित कर दिया जाए, क्योंकि वह चुनाव में दूसरे स्थान पर थे।

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