Congress ने दिया सिद्धू की उम्‍मीदों को तगड़ा झटका, पंजाब सरकार में उन्हें लेने या न लेने का फैसला ‘कैप्टन’ पर

सूबे के मुख्यमंत्री(Captain Amarinder Singh) ने भी साफ कर दिया है कि जो लोग पार्टी के लिए एनएसयूआइ(NSUI) से काम कर रहे हैं, उनकी जगह पर 2017 में आने वाले को प्रधान कैसे बनाया जा सकता है।

Avatar Written by: October 9, 2020 12:49 pm
Navjot Singh Siddhu

नई दिल्ली। भाजपा से कांग्रेस में गए नवजोत सिंह सिद्धू इन दिनों पार्टी आलाकमान की नाराजगी झेल रहे हैं। दरअसल 4 अक्टूबर को पंजाब के मोगा में हुई राहुल गांधी की रैली में सिद्धू ने अपनी राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला, जिसके बाद से वहां मौजूद पार्टी के नेता खुद को असहज महसूस कर रहे थे। इस रैली में सिद्धू द्वारा दिए बयान के बाद से अब इस कयास पर पानी फिर गया है कि सिद्धू को पंजाब सरकार या पार्टी में फिर स्थापित किया जा सकता है। पार्टी में फिर से सक्रिय करने के कयासों पर विराम लगाते हुए पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने साफ कह दिया है कि सिद्धू के लिए अभी पार्टी और राज्‍य सरकार में कोई जगह नहीं है।  रावत के इस बयान से सिद्धू के कांग्रेस में फिर से स्‍थापित होने की उम्‍मीदों को झटका लगा है। सिद्धू की वापसी को लेकर हरीश रावत का कहना है कि, पंजाब कांग्रेस की कमान सुनील जाखड़ के हाथ में है और पंजाब सरकार में उन्हें लेने या न लेने का फैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को करना है।

Navjot Singh Siddhu

पार्टी या सरकार में कोई वैकेंसी नहीं

रावत ने कहा कि ऐसे में आज की तारीख में नवजोत सिंह सिद्धू के लिए पार्टी या सरकार में कोई वैकेंसी नहीं है। हालांकि, रावत इस बात को जरूर कहते हैं कि अभी तो नहीं बल्कि आने वाले समय में उनका बेहतर उपयोग किया जाएगा। रावत का यह बयान राहुल गांधी की पंजाब में खेती बचाओ यात्रा खत्म होने के बाद आना बेहद महत्‍वपूर्ण है।

siddhu

अंदरखाने पार्टी काफी नाराज

दरअसल सिद्धू का खेल 4 अक्टूबर को मोगा में हुई राहुल गांधी की रैली ने खराब कर दिया। सिद्धू ने इस रैली में जिस तरह अपनी ही सरकार पर हमला बोल गए, उससे पंजाब कांग्रेस के नेता असहज हो गए थे। इसकी वजह से अंदरखाने पार्टी काफी नाराज है। यही कारण था कि मोगा रैली के बाद सिद्धू को बाकी जगह बोलने का मौका नहीं दिया गया। हरीश रावत का कहना है कि उन्हें पटियाला में बुलाया जाना था, लेकिन राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन होने की वजह से टाइमिंग में बदलाव करना पड़ा।

सूबे के मुख्यमंत्री ने भी साफ कर दिया है कि जो लोग पार्टी के लिए एनएसयूआइ से काम कर रहे हैं, उनकी जगह पर 2017 में आने वाले को प्रधान कैसे बनाया जा सकता है। भविष्य में उनके क्या उपयोग होगा। इस पर रावत ने कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा।

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