दिल्ली हिंसा : ताहिर हुसैन को 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया

आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन को सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

Written by: March 6, 2020 7:58 pm

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन को सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। ताहिर हुसैन को एक दिन पहले गुरुवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने राउज एवेन्यू कोर्ट के पार्किंग से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन को आज कोर्ट में पेश किया था। जहां कोर्ट ने उनको पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

Tahir Hussain

गिरफ्तारी से पहले ताहिर हुसैन ने खुद पर लगे सारे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मुझे फंसाया जा रहा है। उपद्रवियों ने मेरे मकान का गलत इस्तेमाल किया है। ताहिर ने कहा था कि मैं किसी भी प्रकार की जांच के लिए तैयार हूं। भाजपा ने मुझे साजिश के तहत फंसाया है। मैंने अपने घर से डंडे से उपद्रवियों को भगाने की कोशिश की थी। मैं नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हूं। पुलिस ने मुझे खुद मेरे घर से रेस्क्यू किया था।

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दिल्ली हिंसा के बाद से ताहिर की तलाश में जुटी एसआईटी ने दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 स्थानों पर उसकी तलाश में छापेमारी की थी। एसआईटी सूत्रों की मानें तो ताहिर 2 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते रहे। 24 तारीख को 12 बजे तक की कॉल डिटेल्स खंगाली गई, जिसके मुताबिक ताहिर हुसैन 24 की रात 12 बजे के आस-पास तक चांद बाग के उसी घर में मौजूद था। वहीं जांच मे यह बात भी सामने आई थी कि ताहिर ने 24 तारीख को (हिंसा के दिन) दिनभर में करीब 150 कॉल किए थे। जांच में जुटी पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह कॉल उसने किसको की थी।

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मामले की जांच में जुटी क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने फरार ताहिर हुसैन के फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकाली है। उसकी 19 नंबरों पर ज्यादा बातचीत हुई है। इस आधार पर यह माना जा रहा है कि जिन नंबरों पर उसकी ज्यादा बातचीत हुई है, वह उसके करीबी नेटवर्क में हैं और उनकी भूमिका संदिग्ध हो सकती है।

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दिल्ली हिंसा में मारे गए लोगों के पोस्टमार्टम की होगी वीडियोग्राफी

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सभी सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिया कि दिल्ली हिंसा में मारे गए सभी लोगों के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी की जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अस्पतालों को 11 मार्च तक किसी भी अज्ञात शव का समापन नहीं करने का निर्देश दिया। साथ ही अधिकारियों को सभी मृतकों के डीएनए नमूने सुरक्षित रखने को कहा गया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति आई. एस. मेहता ने यह फैसला सुनाया है।

delhi highcourt

पीठ लापता लोगों से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें एक हमजा नामक व्यक्ति भी शामिल है। हमजा के बहनोई अंसारी एम. आरिफ राष्ट्रीय राजधानी के पूर्वोत्तर इलाके में 23 फरवरी को हुई हिंसा के दौरान हमजा के लापता होने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचे थे। हिंसा में मरने वालों की संख्या 53 तक पहुंच चुकी है। इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि वह अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सरकारी मुर्दाघरों में रखे गए सभी अज्ञात शवों की तस्वीरों सहित उनकी तमाम जानकारी प्रकाशित करे। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस को आधिकारिक वेबसाइट पर पोस्टमार्टम और डीएनए नमूनों सहित विशिष्ट जानकारी प्रकाशित करने का भी आदेश दिया है।