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Delhi: फिर सामने आया दिल्ली के स्कूलों का खस्ताहाल, निर्माण में कमियों पर शिक्षा विभाग ने पीडबल्यूडी से मांगी रिपोर्ट

दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल के बारे में जो खुलासा किया है, उसके मुताबिक, राजधानी दिल्ली में एक या दो नहीं, बल्कि कई ऐसे स्कूल आपको मिल जाएंगे, जहां की इमारतें अब अपनी जिंदगी की आखिरी सांसें गिनने में मसरूफ हो चुकी हैं। यह हमारा नहीं, बल्कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय का कहना है।

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नई दिल्ली। कभी पंजाब, तो कभी गुजरात, तो कभी उत्तर प्रदेश, तो कभी हरियाणा, तो कभी हिमाचल- प्रदेश और कभी-कभी तो सात समंदर पार विलायती मुल्कों में भी दिल्ली के ‘शिक्षा मॉडल’ की नुमाइश करने के लिए दिल्ली के मुखिया अरविंद केजरीवाल जिस तरह से छटपटाते रहते हैं, उसे देखकर ऐसा लगता है कि यकीनन केजरीवाल सरकार ने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प कर दिया है। यकीनन उन्होंने कमाल कर दिया है। इतना ही नहीं, एक बार तो उन्हें किसी विलायती मुल्क में दिल्ली के शिक्षा मॉडल को पेश करने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन बीजेपी ने उन्हें जाने नहीं दिया, जिसे लेकर बेचारे केजरीवाल साहब की नाराजगी अपने चरम पर पहुंच गई और उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि ये लोग आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता से डर गए हैं, लेकिन अब दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने अरविंद केजरीवाल के शिक्षा मॉडल की जिस तरह से पोल खोलकर रख दी है, उसे देखकर आप बीजेपी का शुक्रिया अदा करते हुए कहेंगे कि शुक्र है कि केंद्र की मोदी सरकार ने उन्हें वियायती धरा में दिल्ली के शिक्षा मॉडल को पेश करने की इजाजत नहीं दी। अगर दी होती तो वो नाक कटा कर धर देते। अब आप इतना सब कुछ पढ़ने के बाद मन ही मन सोच रहे होंगे कि आखिर आप ऐसा क्यों कह रहे हैं। आखिर माजरा क्या है। जरा कुछ खलकर बताएंगे।

तो आपको बता दें कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल के बारे में जो खुलासा किया है, उसके मुताबिक, राजधानी दिल्ली में एक या दो नहीं, बल्कि कई ऐसे स्कूल आपको मिल जाएंगे, जहां की इमारतें अब अपनी जिंदगी की आखिरी सांसें गिनने में मसरूफ हो चुकी हैं। यह हमारा नहीं, बल्कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय का कहना है। जी हां… यही नहीं, निदेशालय ने आगे अपने खुलासे में यह भी कहा है कि विगत जुलाई माह में दिल्ली के कई स्कूलों ने अपनी बदहाली को लेकर दिल्ली सरकार के द्वार पर दस्तक दिए थे, लेकिन अफसोस सरकार की तरफ से कोई भी कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा गया। दिल्ली शिक्षा निदेशालय के निदेशक हिमासुं गुप्ता का कहना है कि वे विगत 6 जुलाई को राधे श्याम पार्क स्थिति सर्वोदय बाल विद्यालय में गए थे, जहां उन्होंने विद्यायलय में मौजूद बेशुमार दुश्वारियों को देखा और इसकी शिकायत भी की, लेकिन अफसोस इसे सुधारने की दिशा में किसी भी प्रकार की कार्रवाई केजरीवाल सराकर की ओर से नहीं की गई। शिक्षा निदेशालय के निदेशक ने एक नहीं, बल्कि बेशुमार दुश्वारियों का जिक्र किया।

arvind kejriwal

निरक्षक प्रतिवेदन के मुताबिक, उपरोक्त स्कूल की इमारत का निर्माण साल 1981 में किया था। इमारत में कुल 76 कमरें हैं, जिनमें से महज 34 कमरे ही इस्तेमाल में लाए जाते हैं। वहीं, इस संदर्भ में लोक निर्माण विभाग से भी इस संदर्भ में रिपोर्ट की मांग की गई है। अब ऐसे में जब दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने अपनी शिक्षा मॉडल का गुणगान करने से नहीं थकते हैं। ऐसी स्थिति में अब जब शिक्षा निदेशालय ने उनकी पोल खोलकर रख दी है, तो इस संदर्भ में केजरीवाल सरकार अपने बचाव में क्या कुछ दलीलें पेश करती हैं। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। तब तक के लिए आपर देश दुनिया की तमाम बड़ी खबरों से रूबरू होने के लिए आप पढ़ते रहिए। न्यूज रूम पोस्ट.कॉम

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