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LAC : 3D तकनीक से भारत देगा चीन को टक्कर, इस मॉडल से सीमा पर खड़ा किया 22 हजार सैनिकों के लिए बुनियादी ढांचा

LAC : अंतरराष्ट्रीय सम्बंधों की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि विवाद बिंदु पैंगोंग त्सो झील में चीनी की आक्रामक गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर ने पूर्वी लद्दाख में नए लैंडिंग क्रॉफ्ट को तैनात किया है।

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नई दिल्ली। एक तरफ भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इंडोनेशिया में G20 समिट के दौरान मुलाकात की खबरें आ रही हैं तो दूसरी तरफ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपने इलाके में चीन द्वारा निर्माण के जवाब में भारत ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर में बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है। रक्षा सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार चीनी बिल्डअप की खबरों के बीच भारत ने ये कदम उठाया है। भारतीय सेना ने इस इलाके में चीन के विपरीत 450 टैंकों और 22,000 से अधिक सैनिकों के आवास के लिए बुनियादी ढांचे का बनाया गया है।

एलएसी पर तैनात किया गया लैंडिंग क्रॉफ्ट

अंतरराष्ट्रीय सम्बंधों की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि विवाद बिंदु पैंगोंग त्सो झील में चीनी की आक्रामक गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर ने पूर्वी लद्दाख में नए लैंडिंग क्रॉफ्ट को तैनात किया है। जिसके कारण सीमा पर भारत की गश्त क्षमताओं में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही सैनिकों और सैन्य सामग्री को आसानी से सीमा पर पहुंचाया जा सकेगा। गौरतलब है कि लैंडिग क्रॉफ्ट असाल्ट एक साथ 35 सैनिकों को ले जा सकता है।

भारत चीन सीमारेखा पर बनाया गया 22,000 सैनिकों के लिए बुनियादी ढांचा

आपको बता दें कि इस बाबत रक्षा सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बीते दो वर्षों में 22,000 सैनिकों के लिए राशन और लगभग 450 ए वाहनों और बंदूकों को शामिल करने के लिए आवास और तकनीकी भंडारण का निर्माण किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि चल रही परियोजनाओं को पूरा करने के अलावा सेना का फोकस मौजूदा कामकाजी सीजन में रक्षा तैयारियों में सुधार के लिए स्थायी रक्षा और बुनियादी ढांचा खड़ा करने पर है। इस बुनियादी ढांचे को तैयार करने के लिए भारतीय सेना दिन रात कड़ी मेहनत कर रही है।

चीन को काउंटर करने के लिए 3डी-स्थायी सुरक्षा मॉडल

चीनी सेना भारतीय सीमा पर आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करती है तो वहीं दूसरी तरफ, मंगलवार को भारतीय सेना के इंजीनियर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने सीमाओं के साथ बनाए जा रहे स्थायी बचावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स द्वारा रेगिस्तान क्षेत्र में पहली बार 3डी-मुद्रित स्थायी सुरक्षा घेरे का निर्माण किया गया है। इन बचावों का छोटे हथियारों से लेकर T90 टैंक की मुख्य बंदूक तक के हथियारों के माध्यम से एक ट्रायल किया गया है। भारतीय सेना अब हर मोर्चे पर चीन को करारा जवाब देने के लिए खुद को और भी अधिक मजबूत कर रही है।

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