टिड्डी दल से बचने के लिए किसानों को ढोल-नगाड़ों आदि से शोर मचाने की सलाह

फसलों को बचाने के लिए किसानो से अपील करते हुए जिलाधिकारी सुहास ने कहा कि ग्राम स्तर पर सभी एक साथ एकत्रित होकर तैयारी करें। ढोल नगाड़े, टीन के डिब्बे, थालियां एवं माइक आदि के द्वारा शोर करने से टिड्डी दल खेतों में नीचे नहीं उतरता, जिससे फसलों को नुकसान होने से बचाया जा सकता है।

Avatar Written by: May 29, 2020 9:22 am

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में टिड्डी दल से हो रहे नुकसान से किसानों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि ग्रामीण स्तर पर सब लोग मिलकर ढोल-नगाड़ों आदि से शोर मचाएं। ऐसा करने के पीछे का कारण बताया गया है कि शोर मचाने से टिड्डी दल जमीन पर नहीं उतरते।

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आपको बता दें कि देश के कई राज्यों-शहरों में तबाही मचाने के बाद टिड्डी दल उत्तर प्रदेश पहुंच चुका है। इस संबंध में गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी सुहास एल वाई ने जिले के सभी किसानों को इसका सामना करने की सलाह दी और कहा कि इनके प्रकोप से बचने के लिए ग्राम स्तर पर सब लोग मिलकर ढोल-नगाड़ों आदि से शोर मचाएं।

जिलाधिकारी सुहास एल वाई ने बताया कि टिड्डी दल मध्य प्रदेश के दतिया जिले से उत्तर प्रदेश के झांसी और सोनभद्र जिले में प्रवेश कर चुका है। वर्तमान में झांसी जिले की मोट तहसील से होते हुए नोटा, सेंदरी गांव होते हुए परीछा डैम पहुंच चुका है। वहीं दूसरी ओर राजस्थान में दौसा के सिकराई विकासखंड में टिड्डी दलों की लोकेशन प्राप्त हुई है, जोकि अनुकूल परिस्थितियों में आगरा में प्रवेश कर सकता है।

उन्होंने बताया कि टिड्डी कीट की तीन अवस्था होती हैं, जिसमें से व्यस्क की अवस्था काफी हानिकारक होती है और वह दल दिन के समय सूर्य की चमकीली रोशनी में तेज उड़ाका झुंडों के रूप में उड़ते रहते हैं। फिर शाम के समय वे झाड़ियों और पेड़ों पर आराम करने के लिए नीचे उतर जाते हैं और वहीं पर रात गुजारते हैं।

फसलों को बचाने के लिए किसानो से अपील करते हुए जिलाधिकारी सुहास ने कहा कि ग्राम स्तर पर सभी एक साथ एकत्रित होकर तैयारी करें। ढोल नगाड़े, टीन के डिब्बे, थालियां एवं माइक आदि के द्वारा शोर करने से टिड्डी दल खेतों में नीचे नहीं उतरता, जिससे फसलों को नुकसान होने से बचाया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि टिड्डी दल सूरज डूबने से दिन निकलने तक पेड़ पौधों पर आश्रय लेते हैं। ऐसे प्रभावित क्षेत्रों में कृषि रक्षा रसायनों का छिड़काव ट्रैक्टर माउंट स्प्रेयर, अग्निशमन विभाग की गाड़ियों के साथ-साथ नेपसेक स्प्रेयर से किया जाएगा। इन रसायनों के छिड़काव का समय रात के 11:00 बजे से सुबह 3 बजे के बीच कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस समस्या के बारे में अधिक जानकारी के लिए विकासखंड स्तर पर सहायक विकास अधिकारी, कृषि/कृषि रक्षा, तहसील स्तर पर उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी और जनपद स्तर पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी/ जिला कृषि अधिकारी/ उप कृषि निदेशक से फोन पर संपर्क कर सकते हैं।