मोदी सरकार का बड़ा फैसला, अब पीओके और लद्दाख से मेडिकल की डिग्री लेकर नहीं कर सकेंगे प्रेक्टिस, लोगों की आ रही प्रतिक्रिया…

भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और लद्दाख (laddakh) के मेडिकल कॉलेजों की डिग्री की भारत में मान्यता को लेकर बड़ा फैसला लिया है। जिसके तहत पीओजेकेएल (POJKL) के मेडिकल कॉलेजों की डिग्री भारत में बैन कर दी है।

Avatar Written by: August 13, 2020 12:42 pm

नई दिल्ली। भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और लद्दाख (Laddakh) के मेडिकल कॉलेजों की डिग्री की भारत में मान्यता को लेकर बड़ा फैसला लिया है। जिसके तहत पीओजेकेएल के मेडिकल कॉलेजों की डिग्री भारत में बैन कर दी है। ये फैसला मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (Medical Council of India) ने लिया है।

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दरअसल, अब पीओजेकेएल के मेडिकल कॉलेजों से शिक्षा प्राप्त करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत में आधुनिक चिकित्सा की प्रैक्टिस करने के योग्य नहीं होगा। भारतीय चिकित्सा परिषद की जगह लाए गए ‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ (बीओजी) ने 10 अगस्त को एक सार्वजनिक सूचना में कहा कि समूचा जम्मू कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है।

इस नोटिस के मुताबिक, ”पाकिस्तान ने क्षेत्र के एक हिस्से पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है।” बीओजी के महासचिव डॉक्टर आरके वत्स की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है, ”तदनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र स्थित किसी भी चिकित्सा संस्थान को भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 के तहत अनुमति और मान्यता की जरूरत है।”

नोटिस में कहा गया कि पीओजेकेएल स्थित ऐसे किसी भी चिकित्सा संस्थान को इस तरह की अनुमति नहीं दी गई है। इसमें कहा गया है, ”इसलिए, अवैध रूप से कब्जाए गए भारत के इन इलाकों में स्थित चिकित्सा कॉलेजों से शिक्षा प्राप्त करने वाला व्यक्ति भारत में आधुनिक चिकित्सा की प्रैक्टिस करने के लिए भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 के तहत पंजीकरण हासिल करने के योग्य नहीं होगा।”

सरकार के इस फैसले के बाद लोगों की प्रतिक्रिया आ रही है। एक यूजर ने लिखा, ”इस लिस्ट में पाकिस्तान और बांग्लादेश का नाम भी जोड़ें।”

तो वहीं दूसरे यूजर ने इस फैसले की तारीफ करते हुए लिखा, ”एक अच्छा कदम। ”

अगले यूजर ने लिखा, ”मतलब एक ही झटके में वहां के एमबीबीएस को हाश्मी दवा खाना का हाकिम बना दिया, ये तो फक्र की बात है। ”

एक यूजर ने लिखा, अति उत्तम।”

कई लोग इस फैसले का विरोध भी कर रहे हैं और सपोर्ट भी।

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