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UP: आज से वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में फिर कोर्ट में होगी सुनवाई, इन बिंदुओं पर कोर्ट सुनेगा दलील

वाराणसी के मामले में हिंदू पक्ष की अर्जी पर पहले सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर के कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। जज दिवाकर ने ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराया था। इसके बाद इंतेजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस सर्वे की रिपोर्ट पहले ही आ चुकी है।

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Gyanvapi Row...

वाराणसी। यूपी के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद मामले में आज से फिर वाराणसी के जिला जज की अदालत में सुनवाई शुरू होने जा रही है। जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत इस मामले में आज फिर मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की दलीलों को सुनेगी। मुस्लिम पक्ष इस मामले में पहले 33 बिंदुओं पर आपत्ति जता चुकी है। आज बाकी 23 बिंदुओं पर वो अपनी अपनी आपत्ति दाखिल करेगी। कमेटी के वकील ने हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल याचिका को ही धारा 7/11 के तहत गलत बताया है। कमेटी का कहना है कि हिंदू पक्ष इस मामले में सिविल सूट दाखिल कर ही नहीं सकता। इसकी वजह प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को बताया गया है।

Varanasi Gyanvapi Case..

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट के तहत 1947 की 15 अगस्त को जो भी धार्मिक स्थल जिसके पास था, उसी के पास रहने देने का प्रावधान है। सिर्फ अयोध्या में राम जन्मभूमि को इससे अलग रखा गया था। वाराणसी के मामले में हिंदू पक्ष की अर्जी पर पहले सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर के कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। जज दिवाकर ने ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराया था। इसके बाद इंतेजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अर्जी को वाराणसी के जिला जज के यहां ट्रांसफर कर उसकी मेंटेनेबिलिटी पर पहले सुनवाई करने का निर्देश दिया था। साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में मिली शिवलिंग जैसी आकृति की सुरक्षा के निर्देश दिए थे।

shivling gyanvapi masjid

जिला जज की ओर से आज सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से कराए गए सर्वे की रिपोर्ट और वीडियो के मीडिया में लीक होने के मसले पर भी सुनवाई हो सकती है। सर्वे की रिपोर्ट और वीडियो हिंदू पक्ष को दिए गए थे। ये मीडिया में लीक हो गए थे। हिंदू पक्ष का कहना है कि जिस लिफाफे में इसे दिया गया, उसे उन्होंने खोला तक नहीं है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने इस मामले में हिंदू पक्ष पर कार्रवाई की मांग की है। इसकी वजह ये है कि सर्वे रिपोर्ट और वीडियो देते वक्त हिंदू पक्ष ने लिखकर दिया था कि इसे वो कोर्ट की मंजूरी के बगैर कतई किसी से साझा नहीं करेंगे।

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