Ayodhya: नेपाल से लाई जा रही शालिग्राम शिलाओं का अयोध्या में होगा भव्य स्वागत, 6 करोड़ साल पुरानी शिलाओं से बनेगी भगवान राम की मूर्ति

Ayodhya: इन दो बड़ी शिलाओं को नेपाल की गंडकी नदी से लाया गया है, जिन्हें ढूंढने में काफी समय लगा है। जानकारों का कहना है कि इतने बड़े शालिग्राम शिलाओं को ढूंढने में काफी मेहनत करनी पड़ी है।

Avatar Written by: January 29, 2023 9:48 am

नई दिल्ली। भारत संस्कृति और धर्म के जुड़ा देश है जिसे और मजबूत बनाता है हमारा पौराणिक इतिहास। इसी कड़ी में नेपाल से अयोध्या शालिग्राम शिलाएं लाई जा रही हैं, जिसके स्वागत की तैयारी अयोध्या में हो चुकी है। सभी भक्त बांहे फैलाए शिलाओं के स्वागत करने का इंतजार कर रहे हैं। 2 फरवरी को दो बड़ी शालिग्राम की शिलाएं अयोध्या आने वाली हैं। नेपाल से शिलाएं को रवाना किया जा चुका है और अब यूपी के अयोध्या आने का इंतजार है।

काफी पुरानी हैं दोनों शिलाएं

इन दो बड़ी शिलाओं को नेपाल की गंडकी नदी से लाया गया है, जिन्हें ढूंढने में काफी समय लगा है। जानकारों का कहना है कि इतने बड़े शालिग्राम शिलाओं को ढूंढने में काफी मेहनत करनी पड़ी है। अब उन्हीं शिलाओं से भगवान राम और माता सीता की मूर्ति का निर्माण किया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि ये शिलाएं  6 करोड़ वर्ष पुरानी हैं और दोनों शिलाओं का वजन 40 टन है। पहली शिला 26 टन वज़न की है और दूसरी 14 टन वज़न की शिला है। इस शिला से भगवान राम के बाल स्वरूप आदम कद की मूर्ति निर्माण का काम होगा। कहा ये भी जा रहा है कि नेपाल के पूर्व पीएम कमलेंद्र निधि भी शिलाओं के साथ अयोध्या आ सकते हैं।

जनकपुरी में भी होगा अद्भुत स्वागत

हालांकि इन विशाल शिलाओं से बनाई जाने मूर्ति को राम लला मंदिर में कहां स्थापित किया जाएगा, इसका फैसला अभी तक नहीं हो पाया था। इसके अलावा शिलाओं के स्वागत के लिए भी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अयोध्या पहुंचने से पहले जनकपुरी में शिलाओं की  5 कोसी परिक्रमा होगी। जिसकी अगुवाई महंत संत श्रीरामतपेश्वरदास महाराज करेंगे जिसके बाद ही शिलाओं को अयोध्या भेजा जाएगा।


भारत में गंडकी नदी का बड़ा महत्व है, उसे नेपाल में शालिग्राम नदी कहा जाता है और भारत में प्रवेश करते ही नदी नारायणी के नाम से जानी जाती है। इस नदी की खासियत है कि इसके भीतर मिले पत्थर काले होते हैं, जिन्हें भगवान विष्णु के अवतार शालिग्राम के रूप में पूजा जाता है।

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