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Rahul Gandhi: मोदी सरनेम को बताया चोर, राफेल मामले में भी थे फंसे, कोर्ट से अब तक दो बार जोर का झटका खा चुके हैं राहुल गांधी

ये दूसरा मौका है, जब कानूनी मामले में राहुल गांधी फंसे हैं। इससे पहले उनको राफेल मामले में गलतबयानी करने पर सुप्रीम कोर्ट से माफी भी मांगनी पड़ी थी। दोनों मामले आपको बताते हैं।

सूरत। राहुल गांधी को सूरत के कोर्ट ने मानहानि के मामले में दोषी ठहराया है। ये मामला 4 साल पुराना है। साल 2019 में राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कर्नाटक के कोलार में कहा था कि कैसे सभी चोरों का सरनेम यानी उपनाम मोदी है। ये दूसरा मौका है, जब कानूनी मामले में राहुल गांधी फंसे हैं। इससे पहले उनको राफेल मामले में गलतबयानी करने पर सुप्रीम कोर्ट से माफी भी मांगनी पड़ी थी। दोनों मामले आपको बताते हैं। पहले जान लीजिए कि आज जिस मानहानि केस में राहुल गांधी दोषी करार दिए गए, उसे किसने किया था। राफेल वाला मामला उसके बाद हम आपको बताएंगे।

rahul gandhi

मोदी सरनेम वालों को चोर कहने पर राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का केस गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने किया था। पूर्णेश मोदी ने राहुल पर सूरत के कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि कांग्रेस नेता के बयान से पूरे मोदी समुदाय की बेइज्जती हुई है। दरअसल, राहुल गांधी ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी का हवाला देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ निशाना साधा था। इस मामले में पूर्णेश मोदी की अर्जी पर सूरत के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एचएच वर्मा ने बीते शुक्रवार को फैसला सुरक्षित किया था। मोदी सरनेम वालों की बेइज्जती करने के इस मामले में राहुल गांधी भी सूरत के कोर्ट में तीन बार पेश हुए थे। पिछली बार राहुल 2021 के अक्टूबर महीने में कोर्ट आए थे। तब उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था।

rahul gandhi and supreme court

राहुल गांधी 2019 में ही पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ ‘चौकीदार चोर है’ का नारा देकर सुप्रीम कोर्ट में भी अवमानना केस में फंसे थे। तब राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि अदालत ने भी कहा है कि चौकीदार यानी पीएम मोदी चोर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले में भ्रष्टाचार की सुनवाई करते हुए इस तरह की कोई बात कही ही नहीं थी। राहुल की इस गलतबयानी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। तब कोर्ट ने अवमानना के तहत उनको तलब किया था। राहुल गांधी ने इस पर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी। जिसके बाद वो अवमानना से बच सके थे।