चुनाव 2019

गौरतलब है कि बिहार में भी लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस, राजद समेत विपक्षी दलों के महागठबंधन को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। महागठबंधन को राज्य की 40 में से सिर्फ एक सीट मिली है, जबकि राजद का सूपड़ा साफ हो गया है। 

एक नए कैबिनेट सचिव का आना तय है क्योंकि मौजूदा कैबिनेट सचिव पी. के. सिन्हा का विस्तारित कार्यकाल जून के मध्य में समाप्त हो रहा है। सिन्हा को पिछले साल जून में एक साल का दूसरा विस्तार मिला था।

नोटा के मामले में तीसरे नंबर पर समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र रहा जहां 35,417 मतदाताओं को किसी दल के प्रत्याशी पसंद नहीं आए और विकल्प के रूप में उन्होंने नोटा का विकल्प चुना।

BJP के करीब आधा दर्जन विधायक लोकसभा चुनाव जीत कर सासंद बन गये। उनके सांसद बनने के बाद उन्हें विधानसभा सीट छोड़नी होगी। जिसकी वजह से वहां पर उपचुनाव कराने होंगे।

महागठबंधन के एक अन्य घटक दल रालोसपा को सबसे नुकसान उठाना पड़ा। पिछले चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा ने तीन सीटों पर कब्जा जमाकर शत प्रतिशत सफलता पाई थी।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आंध्र प्रदेश में 175 सदस्यीय वाले विधानसभा में 151 सीटें जीत ली है और साथ ही इसने 25 में से 22 लोकसभा सीटें भी अपने नाम कर ली है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कुल 80 सीटों पर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 71, कांग्रेस को दो, समाजवादी पार्टी को पांच और अपना दल को दो सीट मिली थीं।

लोकसभा चुनाव के रुझानों में एनडीए को 340 से ज्यादा सीटें मिलती नजर आ रही हैं। विपक्ष पूरी तरह धराशायी हो गया है। बीजेपी ने अपना 2014 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। राहुल गांधी ने भी मीडिया के सामने आकर हार की जिम्मेदारी ली है।

वाराणसी के ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहों की यह स्थिति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी तो बन सकती है, लेकिन हो सकता है भाजपा बहुमत तक न पहुंच सके।