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Imran Khan: इमरान खान को तोशाखाना मामले में बड़ी राहत, इस्लामाबाद HC ने दिया रिहा करने का आदेश

Imran Khan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशखाना मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दरअसल, कोर्ट ने इमरान को रिहा करने का आदेश दे दिया है। 

नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दरअसल, कोर्ट ने इमरान को रिहा करने का आदेश दे दिया है। रिहाई के साथ ही इमरान को मिली तीन साल की सजा पर भी रोक लगा दी गई है। इससे पहले इमरान की बेगम बुशरा बीबी ने उन्हें जेल में मारने की आशंका व्यक्त की थी। बुशरा बीवी ने आशंका जताई थी कि जेल में इमरान के खाने में जहर मिलाकर उन्हें मारने की कोशिश की जा सकती है। अब माना जा रहा है कि बुशरा की इन्हीं दलीलों को ध्यान में रखते हुए इमरान को रिहा करने का आदेश दिया गया है। उधर, बताया जा रहा है कि फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश भी इमरान के करीबी हैं। जिसे ध्यान में रखते हुए उनके प्रति नरम रुख अख्तियार किया गया है।

हालांकि इमरान को जेल में हर तरह की सुविधाएं दी जा रही थीं। उन्हें उनकी पसंद का खाना जेल में मुहैया कराया जा रहा था, लेकिन इससे पहले खबर आई थी कि उन्हें किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं जा रही है। इसके विपरीत उन्हें छोटे से कमरे में रहना पड़ रहा है, जहां पंखा भी नहीं चलता है। वहीं,  बेशक इमरान को तोशाखाना मामले में उन्हें रिहा करने का आदेश दे दिया गया हो, लेकिन उनकी संसद सदस्यता बहाल नहीं की गई है। लिहाजा वो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, जिससे साफ जाहिर है कि इमरान की रिहाई से पीटीआई को सियासी मोर्चे पर कोई खास फायदा होने वाला नहीं है। उधर, बताया जा रहा है कि पाकिस्ताी सेना का मौजूदा दौर में इमरान के प्रति नरम रूख है।

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बता दें कि बीते दिनों निचली अदालत ने इमरान खान को तोशाखाना मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा चुनाव आयोग ने उनके चुनाव लड़ने पर पांच सालों तक के लिए रोक लगा दी थी। जिसके बाद इमरान ने निचली अदालत के इस फैसले को इस्लामाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। जहां से अब उन्हें बड़ी राहत मिली है। बहरहाल, अब आगामी दिनों में इमरान सियासी मोर्चे पर क्या कुछ कदम उठाते हैं। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। वहीं, इमरान की रिहाई का आदेश देने वाले न्यायाधीश ने कहा कि निचली अदालत द्वारा दिया गया फैसला पक्षपाती और निष्पक्ष नहीं था।