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China On Defence Budget: चीन ने रक्षा बजट कम करने से किया साफ इनकार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया था प्रस्ताव

China On Defence Budget: ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स के आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में चीन का रक्षा बजट 266 बिलियन डॉलर के बराबर था। यानी चीन ने अपनी जीडीपी का 1.7 फीसदी हिस्सा रक्षा बजट के लिए रखा। चीन की सेना में 31.70 लाख सैनिक हैं। इनमें से 5.10 लाख रिजर्व हैं। वहीं, अमेरिका का रक्षा बजट देखें, तो पेंटागन ने साल 2025 के लिए 850 बिलियन डॉलर से कम के बजट का अनुरोध किया। जो संशोधन के बाद 895 बिलियन डॉलर हो गया है।

बीजिंग। चीन ने अपना रक्षा बजट कम करने से साफ इनकार कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रस्ताव किया था कि अमेरिका के साथ चीन भी अपने रक्षा बजट में 50 फीसदी की कमी कर ले। इस पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान का कहना है कि उनके देश का रक्षा खर्च बहुत कम है। कम्युनिस्ट देश के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने कहा कि चीन हमले की जगह आत्मरक्षा की नीति को ही मानता है। साथ ही चीन कभी भी हथियारों की दौड़ में भी शामिल नहीं रहा है। लिन जियान ने कहा कि चीन हमेशा दुनिया में शांति कायम कराने के लिए काम करता रहा है और वो स्थिरता लाया है।

 

ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स के आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में चीन का रक्षा बजट 266 बिलियन डॉलर के बराबर था। यानी चीन ने अपनी जीडीपी का 1.7 फीसदी हिस्सा रक्षा बजट के लिए रखा। चीन की सेना में 31.70 लाख सैनिक हैं। इनमें से 5.10 लाख रिजर्व हैं। वहीं, अमेरिका का रक्षा बजट देखें, तो पेंटागन ने साल 2025 के लिए 850 बिलियन डॉलर से कम के बजट का अनुरोध किया। जो संशोधन के बाद 895 बिलियन डॉलर हो गया है। तीन साल पहले अमेरिका का रक्षा बजट करीब 700 बिलियन डॉलर था।

 

दरअसल, ताइवान के मसले पर चीन और अमेरिका के बीच तनातनी रहती है। ऐसे में चीन किसी सूरत में अपनी सुरक्षा को कम नहीं कर सकता। चीन पहले भी एक बार ताइवान की पूरी तरह घेराबंदी कर सैन्य अभ्यास कर चुका है। एक बार फिर चीन ने ताइवान के पास समुद्र में सैन्य अभ्यास करने का एलान किया है। जिसके बाद ताइवान की सेना को सतर्क किया गया है। दक्षिणी चीन सागर के मसले पर भी चीन और अमेरिका के बीच टकराव है। वहीं, अमेरिका लगातार ये कहता है कि वो ताइवान को सैन्य मदद जारी रखेगा। जबकि, चीन का इरादा हमेशा ही ताइवान को अपना हिस्सा बनाने का रहा है।