Corona India: रिसर्च में पता चली ये बात- भारत में इस उम्र के लोगों को है कोरोना से मौत का अधिक खतरा

Corona : कोरोना(Corona) से होने वाली मौतों को देखा जाय तो अधिकतर ऐसे लोग हैं जो किसी ना किसी बीमारी से ग्रसित हैं। इनमें ज्यादातर मधुमेह(Diabetes) से पीड़ित हैं। अध्ययन में पाया गया है कि मृतकों में 63 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो पहले से किसी एक गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे

Avatar Written by: October 2, 2020 3:24 pm
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नई दिल्ली। देश में कोरोना के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार को पूरे देश में कोरोना के कुल 63 लाख से अधिक मामले हो चुके हैं। वहीं अब कोरोना की वजह से देशभर में मरने वालों की संख्या 1 लाख के करीब हो चुकी है। शनिवार को यह आंकड़ा एक लाख के पार होगा। ऐसे में अब एक शोध में दावा किया गया है कि भारत में 40 से 70 के बीच की उम्र अधिक संवेदनशील है। माना गया है कि इस उम्र के लोगों में कोरोना से मौत होने के अधिक चांस हैं। कोरोना को लेकर हुए अब तक के सबसे बड़े विश्लेषण में पाया गया है कि विकसित देशों की तुलना में भारत (India) में 40 वर्ष से 69 वर्ष तक की आयुवर्ग में कोरोना वायरस संक्रमण के अधिक मामले सामने आए हैं और मृतकों में भी इसी आयुवर्ग के अधिक लोग शामिल हैं। यह विश्लेषण करने वाले अनुसंधानकर्ताओं में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सरकार के अनुसंधानकर्ता भी शामिल हैं।

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पत्रिका ‘साइंस’ में प्रकाशित अध्ययन के तहत, दोनों राज्यों में कोविड-19 के 84,965 पुष्ट मामलों के संपर्क में आए 5,75,071 लोगों में बीमारी के संक्रमण के तरीके का आकलन किया गया। नई दिल्ली में ‘सेंटर फॉर डिजीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी’ के वैज्ञानिक आर लक्ष्मीनारायण समेत वैज्ञानिकों के समूह के अनुसार, इस अध्ययन के निष्कर्ष कम एवं मध्यम आय वाले देशों में महामारी फैलने के तरीके के बारे में जानकारी देते हैं।

देश में कोरोना की वजह से हो रही मौतों को देखते हुए वैज्ञानिकों ने अपने शोध को लेकर कहा गया है कि, अधिक आयु वाले देशों की तुलना में दोनों भारतीय राज्यों में युवकों में संक्रमण के अधिक मामले सामने आए हैं और मृतकों में भी युवक अधिक शामिल हैं। अध्ययन में कहा गया है कि समान आयु के संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से संक्रमण का अधिक खतरा होता है। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि ऐसा नवजात से 14 वर्ष के बच्चों एवं 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में अधिक देखा गया है।

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कोरोना से होने वाली मौतों को देखा जाय तो अधिकतर ऐसे लोग हैं जो किसी ना किसी बीमारी से ग्रसित हैं। इनमें ज्यादातर मधुमेह से पीड़ित हैं। अध्ययन में पाया गया है कि मृतकों में 63 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो पहले से किसी एक गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे और 36 प्रतिशत लोगों को पहले से दो या अधिक बीमारियां थीं। वैज्ञानिकों ने बताया कि मृतकों में से 45 प्रतिशत लोग मधुमेह से पीड़ित थे। लक्ष्मीनारायण ने कहा कि यह अध्ययन आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के प्रयासों से संभव हुआ, जिसमें दोनों राज्यों के हजारों स्वास्थ्यसेवा कर्मियों ने मदद की।

वहीं उन्होंने कहा कि संक्रमण के मामलों एवं मृतकों का अनुपात (सीएफआर) पांच वर्ष से 17 वर्ष के आयुवर्ग में 0.05 प्रतिशत और 85 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 16.6 प्रतिशत है। अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि दोनों राज्यों में मरीज मौत से पहले अस्पताल में औसतन पांच दिन रहे, जबकि अमेरिका में मरीज मौत से पहले करीब 13 दिन अस्पताल में रहे। आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु भारत के उन राज्यों में शामिल हैं, जहां स्वास्थ्यकर्मियों की सर्वाधिक संख्या है और प्रति व्यक्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च भी सबसे अधिक है।