देश में संक्रमण के 80% मामलों में लक्षण सामान्य, सिर्फ 20 फीसदी को ICU की जरूरत : स्वास्थ्य मंत्रालय

मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि कोविड मरीजों का तीन चरणों में इनका इलाज किया जा रहा है। पहले चरण में संदिग्ध मरीजों को क्वारैंटाइन सेंटर में रखा जाता है।

Avatar Written by: April 13, 2020 4:43 pm

नई दिल्ली। देशभर में आए कोरोना के मामले और उनमें दिखने वाले लक्षणों पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि, 29 मार्च को देश में 979 पॉजिटिव केस थे लेकिन अभी ये संख्या 9 हजार के पार है। इनमें से केवल 20% ही ऐसे हैं, जिन्हें आईसीयू की जरूरत है बाकी मामलों में लक्षण सामान्य है। जिसका मतलब ये हुआ कि कोरोना के 80% मामले ऐसे हैं, जिनमें लक्षण बेहद सामान्य हैं बाकी बचे 20% केस ही गंभीर लक्षण वाले हैं।

मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि कोविड मरीजों का तीन चरणों में इनका इलाज किया जा रहा है। पहले चरण में संदिग्ध मरीजों को क्वारैंटाइन सेंटर में रखा जाता है। पॉजिटिव केस आने पर उन्हें कोविड हेल्थ केयर सेंटर में शिफ्ट कर दिया जाता है। यहां भी आईसीयू की सुविधा होती है। लव अग्रवाल ने कहा कि इसमें अगर कोई गंभीर मरीज होता है तो उन्हें डेडीकेटेड कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। ऐसे मरीजों की संख्या 15% ही होती है।

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लॉकडाउन में खाद्य पदार्थों की किल्लतों पर गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिल श्रीवास्तव ने कहा कि, केंद्रीय स्तर पर लॉकडाउन से होने वाली परेशानी को कम करने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। इसमें रेलवे, सिविल एविएशन के अधिकारी मिलकर राज्यों में आ रही सभी परेशानियां सुलझा रहे हैं। श्रीवास्तव के मुताबिक देशभर में खाद्य पदार्थों, जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन पर बिल्कुल भी रोक नहीं है। गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों से कहा कि इंट्रा स्टेट ट्रांसपोर्टेशन को नहीं रोका जाए और जिले स्तर पर जरूरी सेवा देने वाली सभी कंपनियों के कर्मचारियों को भी पास जारी किया जाए।

वहीं लव अग्रवाल ने टेस्ट की सुविधाओं को लेकर बताया कि जिला स्तर पर अस्पतालों में कोरोना टेस्टिंग की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। इसके लिए देश के 14 एम्स को नोडल अस्पताल बनाया गया है। इनके डॉक्टर्स देशभर के जिला अस्पतालों में टेस्टिंग की सुविधा बढ़ाने पर काम करेंगे।

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उन्होंने कहा कि, कोरोना से निपटने के लिए निजी क्षेत्र का भी सहयोग लिया जा रहा है। अपोलो अस्पताल में चार टेस्टिंग लैब बनाए गए हैं। मैक्स वेलफेयर ने अपने दो अस्पतालों को कोरोना संक्रमितों के लिए दिया है।केंद्रीय विभागों के अन्य अस्पताल भी मिलकर काम कर रहे हैं। 9000 से ज्यादा बेड वाले अस्पताल चिन्हित किए गए हैं। जिन्हें कोरोना मरीजों के लिए तैयार किया जाएगा।

अग्रवाल ने दक्षिण कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि, हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि साउथ कोरिया की तरह हमारे देश में भी यह बीमारी वापसी ना करे। हम अपने कंटेनमेंट उपायों को सही ढंग से लागू कर रहे हैं। इसमें अगर कोई भी चूक हुई तो सारी कोशिशें बेकार हो जाएंगी।