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UCC: समान नागरिक आचार संहिता पर आया सीएम शिवराज का बयान, जानिए क्या बोले मुख्यमंत्री

सीएम शिवराज के उपरोक्त ऐलान को अगले वर्ष होने जा रहे विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ध्यान रहे कि आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए विगत दिनों गुजरात में समान नागरिक आचार संहिता लागू करने की दिशा में कमेटी गठित करने का ऐलान किया था, जिस पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि यह ऐलान चुनाव को देखते हुए किया गया है।

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नई दिल्ली। गुजरात, उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कमेटी गठित करने का ऐलान किया है। उन्होंने बेडवा सेंधवानी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, ‘मैं समान नागरिक आचार संहिता के लागू करने का पक्षधर रहा हूं। आखिर कैसे हमारे देश में दो विधान हो सकते हैं? आखिर क्यों किसी को दो शादियां करने की इजाजत दी जाए?’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘कुछ बदमाश लोग आदिवासियों की बेटियों संग शादी कर जमीन अपने नाम करवा ले रहे हैं। लेकिन, अब ऐसे सभी लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी’। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि, ‘अब समय आ चुका है कि जब पूरे देश में समान नागरिक संहिता को लागू किया जाए। इसी दिशा में मैंने भी कमेटी गठित करने का ऐलान कर दिया है। अतिशीघ्र समान नागरिक संहिता में प्रावाधन किए गए नियमों को क्रियान्वित किया जाएगा’।

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बता दें कि सीएम शिवराज के उपरोक्त ऐलान को अगले वर्ष होने जा रहे विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ध्यान रहे कि आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए विगत दिनों गुजरात में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कमेटी गठित करने का ऐलान किया था, जिस पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि यह ऐलान चुनाव को देखते हुए किया गया है। ध्यान रहे कि इससे पूर्व उत्तराखंड में भी पुष्कर सिंह धामी ने भी समान नागरिक संहिता लागू करने का ऐलान किया था। जिसके बाद सियासी गलियारों में बहस का बाजार गुलजार हो गया। कोई इसका समर्थन कर रहा था, तो कोई विरोध कर रहा है। ध्यान रहे कि कई मौकों पर केंद्र सरकार की ओर से भी समान नगारिक संहिता लागू करने का संकेत दिए जा चुके हैं। लेकिन, राजनीतिक गलियारों का एक बड़ा वर्ग यूसीसी का विरोध कर रहा है। आइए, आगे जानते हैं कि आखिर यूसीसी क्या है।


वर्तमान में सभी अपने धर्म के आधार पर बनाए गए नियमों को अधिक तरजीह देते हैं, जिसे लेकर देश का एक वर्ग आपत्ति जताते हुए आ रहा है। यही नहीं, कई बार मजहबी कायदों को संवैधानिक नियमों से भी ज्यादा तवज्जो दे दी जाती है, जिसे लेकर देश में विरोध भी देखने को मिलता है। अब इन्हीं सब समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता को लागू कराने की मांग प्रबल हो रही है, लेकिन यूसीसी को लेकर लिबरल गैंग को मिर्ची लग गई है, तो वहीं कुछ लोग यूसीसी की पैरोकारी भी कर रहे हैं। अब ऐसी स्थिति में बतौर पाठक आपका उपरोक्त मसले पर क्या कुछ कहना है। आप हमें कमेंट कर बताना बिल्कुल भी मत भूलिएगा।

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