
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया है कि 2 अप्रैल को अमेरिका के इंडिपेंडेंस डे से भारत समेत तमाम देशों के उत्पादों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया जाएगा। यानी भारत में अमेरिका के उत्पादों पर जितना टैरिफ लगता है, उतना ही टैरिफ अमेरिका भी भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाएगा। इससे भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाली चीजों की कीमत में बढ़ोतरी होगी। ट्रंप की ओर से लगाए जा रहे इस रेसिप्रोकल टैरिफ पर भारत ने भी रणनीति तैयार की है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि उनके कदम से टैरिफ के दायरे में आने वाले भारत समेत सभी देश अपना टैक्स घटाएंगे। ट्रंप का कहना है कि भारत सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में शामिल है।
अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि नरेंद्र मोदी सरकार पहले ये विश्लेषण करेगी कि ट्रंप प्रशासन के रेसिप्रोकल टैरिफ का अमेरिका को भारतीय उत्पादों के निर्यात पर क्या असर पड़ रहा है। इसका विश्लेषण करने के बाद ही ट्रंप के टैरिफ से निपटने के उपायों पर फैसला होगा। वहीं, अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अगर भारत को टैरिफ से ज्यादा नुकसान हुआ, तो मोदी सरकार यूरोप, कनाडा और अरब देशों में अपने उत्पादों के लिए और बाजार तलाश सकता है। यानी इन देशों के बाजारों में भारत के उत्पाद ज्यादा बेचने पर जोर दिया जाएगा। इन देशों को पहले ही भारत अनाज समेत कई उत्पादों का निर्यात करता है।
डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से रेसिप्रोकल टैरिफ के एलान के बाद भारत ने अमेरिका में तैयार होने वाली बोरबॉन व्हिस्की पर टैरिफ घटाया था। अमेरिका के हार्ले डेविडसन बाइक पर भी टैरिफ में कमी की गई थी। टैरिफ मुद्दे को सुलझाने की बातचीत के लिए भारत और अमेरिका ने प्रतिनिधि भी तय किए हैं। अमेरिका से व्यापार समझौता करने के लिए भी मोदी सरकार कोशिश कर रही है। ताकि अमेरिका में भारत के उत्पाद महंगे न हों। दिल्ली में बीते दिनों ही भारत और अमेरिका के व्यापार से संबंधित अफसरों की 4 दिन की बैठक भी हो चुकी है। भारत और अमेरिका ने ये भी तय किया है कि सालाना व्यापार 200 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर किया जाएगा। कुल मिलाकर ये तय है कि मोदी सरकार अभी टैरिफ मसले पर हड़बड़ी नहीं दिखाने जा रही। वो सभी प्रभावों को देखते हुए ही आने वाले दिनों में फैसले लेगी।