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Ram Mandir: वाल्मीकि रामायण में हैं ‘चावल’ का वर्णन; इंडी अलायन्स के घटक NCP नेता जितेंद्र आव्हाड का बयान खोखला

Jitendra Awhad Controversy: मीडिया और सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर बवाल मचा हुआ है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने वाल्मीकि रामायण के अयोध्या काण्ड के श्लोक 102 का हवाला देते हुए इस मुद्दे को तूल न देने की बात करके माफ़ी मांग ली। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि क्या केवल आव्हाड के माफ़ी मांग लेने से बात समाप्त हो गयी? क्या उनके वायरल वीडियो का देश की जनता के मन में कोई प्रभाव नहीं पड़ा होगा?

भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा की तिथि 22 जनवरी 2024 जैसे-जैसे निकट आ रही है देश का वातावरण राममय होता जा रहा है। पूरे देश में अक्षत कलश यात्राएं और महानिमंत्रण का कार्य व्यापक स्तर पर चल रहा है। सम्पूर्ण हिन्दू समाज इस अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा भी ले रहा है। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से योजनाबद्ध तरीके से निमंत्रण पत्र भी भेजे जा रहे हैं। सोशल मीडिया भी कुल मिलाकर राममय होता जा रहा है। लेकिन कांग्रेस सहित भारत के विपक्षी दल अभी भी ये बात पचा नहीं पा रहे हैं कि वास्तव में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अब एक वास्तविकता हो गया है। इसलिए इनकी तरफ से प्रतिदिन कोई न कोई बवाल मचाया जा रहा है। ये बवाल मचाने में इंडी अलायन्स के सहयोगी दल भी पीछे नहीं है।

एक तरफ तो चारा घोटाले में सजा प्राप्त लालू प्रसाद के बेटे (जो देश भर में इसलिए प्रसिद्ध हैं कि वे नौवीं फेल है) हैं। जिनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे मंदिर के लिए एकत्र धन को लोगों के रोजगार और अच्छी शिक्षा पर खर्च करने की बात कर रहे हैं। तो दूसरी ओर शरद पवार की एनसीपी के नेता जितेंद्र आव्हाड हैं, जिन्होंने भगवान राम को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जितेंद्र आव्हाड का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे बोल रहे हैं कि “तब राइस (चावल) नहीं था। तब खाते क्या थे राजा राम…राम क्षत्रिय था तो क्षत्रिय का खाना ही मांसाहारी होता है…राम का खाना क्या था?…इस देश के 80 प्रतिशत लोग मांसाहारी हैं…देश को शाकाहारी बनाना चाहते हैं क्या?…”

मीडिया और सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर बवाल मचा हुआ है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने वाल्मीकि रामायण के अयोध्या काण्ड के श्लोक 102 का हवाला देते हुए इस मुद्दे को तूल न देने की बात करके माफ़ी मांग ली। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि क्या केवल आव्हाड के माफ़ी मांग लेने से बात समाप्त हो गयी? क्या उनके वायरल वीडियो का देश की जनता के मन में कोई प्रभाव नहीं पड़ा होगा?

आइए अब विश्लेषण करते हैं:-

1. पहले वायरल वीडियो पर बात करते हैं, जिसमें जितेंद्र आव्हाड बोल रहे हैं कि “तब (श्रीराम के काल में) राइस (चावल) नहीं था। तब खाते क्या थे राजा राम”

इंडी अलायन्स के नेता जितेंद्र आव्हाड का यह प्रश्न उनके रामायण के प्रति अज्ञान का नमूना है। क्योंकि गीता प्रेस वाल्मीकि रामायण में ही उस समय धान, जौ, गेहूं, दाल, चना, तिल आदि के खेती का वर्णन है। संदर्भ:-
गीता प्रेस वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 5, श्लोक 17

गृहगाढामविच्छिद्रां समभूमौ निवेशिताम्।
शालितण्डुलसम्पूर्णामिक्षुकाण्डरसोदकाम् ॥१७॥

पुरवासियों के घरों से उसकी आबादी इतनी घनी हो गयी थी कि कहीं थोड़ा-सा भी अवकाश नहीं दिखायी देता था। उसे समतल भूमि पर बसाया गया था। वह नगरी जड़हन धान के चावलों से भरपूर थी। वहां का जल इतना मीठा या स्वादिष्ट था, मानो ईख का रस हो ।
गीता प्रेस वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड, सर्ग 16, श्लोक 16-17

बाष्पच्छन्नान्यरण्यानि यवगोधूमवन्ति च।
शोभन्तेऽभ्युदिते सूर्य नदद्भिः क्रौञ्चसारसैः ॥ १६ ॥

जौ और गेहूं के खेतों से युक्त ये बहुसंख्यक वन भाप से ढंके हुए हैं तथा क्रौञ्च और सारस इनमें कलरव कर रहे हैं। सूर्योदयकाल में इन वनों की बड़ी शोभा हो रही है।॥ १६॥

खजूरपुष्पाकृतिभिः शिरोभिः पूर्णतण्डुलैः।
शोभन्ते किंचिदालम्बाः शालयः कनकप्रभाः ॥ १७॥

ये सुनहरे रंग के जड़हन धान खजूर के फूल-के-से आकारवाली बालों से, जिनमें चावल भरे हुए हैं, कुछ लटक गये हैं। इन बालों के कारण इनकी बड़ी शोभा होती है॥ १७॥
गीता प्रेस वाल्मीकि रामायण, उत्तरकाण्ड, सर्ग 91 श्लोक 19 और 19.1/2

शतं वाहसहस्त्राणां तण्डुलानां वपुष्मताम् ।
अयुतं तिलमुद्रस्य प्रयात्वत्रे महाबल ॥ १९ ॥
चणकानां कुलित्थानां माषाणां लवणस्य च । १९.१/२

‘महावली सुमित्राकुमार! लाखों बोझ ढोनेवाले पशु खड़े दाने वाले चावल लेकर और दस हजार पशु तिल, मूंग, चना, कुल्थी, उड़द और नमकके वोझ लेकर आगे चले॥

इस प्रकार वाल्मीकि रामायण से ही सिद्ध होता है कि उस समय चावल होते थे। तो वीडियो में जो जितेंद्र आव्हाड चावल नहीं होने वाली बात बोल रहे हैं वो खोखली सिद्ध हुई।

2. वीडियो में एनसीपी नेता श्रीराम के क्षत्रिय होने के कारण मांसाहारी होने की बात कर रहे हैं। उस वीडियो में उन्होंने इस बात का कोई प्रमाण नहीं दिया है और कदाचित मीडिया रिपोर्ट्स में अयोध्या काण्ड के श्लोक 102 का हवाला उन्होंने इसी सन्दर्भ में दिया है।

अब उनका यह संदर्भ भी बहुत खोखला है क्योंकि वाल्मीकि रामायण की रचना काण्ड और सर्गों में हुई है। गीता प्रेस वाल्मीकि रामायण के अयोध्या काण्ड में कुल 119 सर्ग हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में आये अयोध्या काण्ड के श्लोक 102 का हवाला दिया है वो किस सर्ग का है ये नहीं बताया गया है। तो क्या इसका मतलब यह नहीं हुआ कि ये संदर्भ भी खोखला है?

संस्कृत भाषा का ज्ञान न होने के कारण ऐसे विवाद पैदा होते हैं। फिर भी भगवान श्रीराम की प्रतिज्ञा का स्मरण करना आवश्यक है। अयोध्या काण्ड के सर्ग 20 के श्लोक 29 में श्रीराम प्रतिज्ञा लेते हुए कहते हैं राजभोग्य वस्तुओं का त्याग करके मुनि की भांति कंद-मूल और फलों का सेवन करते हुए 14 वर्षों तक निर्जन वन में रहूंगा। इसी सर्ग के श्लोक 31 में श्रीराम फल-मूल के आहार से निर्जन वन में जीवन व्यतीत करने की बात करते हैं। सर्ग 28 के श्लोक 12 में श्रीराम माता सीता से वनवास में वृक्षों से अपने आप गिरे फलों के आहार की बात करते हैं।अयोध्या काण्ड के ही सर्ग 34 में श्लोक 59 में श्रीराम अपने पिता दशरथ महारज के सामने फल-मूल का भोजन करने की बात करते हैं। सर्ग 54 श्लोक 16 में भरद्वाज ऋषि से फल-मूल का आहार करते हुए धर्म आचरण करने की बात करते हैं। वहीं सुंदरकाण्ड सर्ग 36 श्लोक 41 में हनुमान जी भी माता सीता से श्रीराम के मांस मधु का सेवन न करने की और फल-मूल आदि के भोजन की बात करते हैं। महाभारत में श्रीराम के मांस न खाने का वर्णन आता है। महाभारत के अनुशासन पर्व के अध्याय 115 में श्लोक 63-67 तक राजाओं की सूची दी गयी है जिन्होंने कभी मांस नहीं खाया था उस सूची में श्रीराम का नाम आता है।

वास्तव में भगवान श्रीराम शाकाहारी थे या मांसाहारी थे यह विवाद ही बचकाना है। आज चर्चा इस विषय पर नहीं होनी चाहिए कि वे क्या खाते थे, बल्कि चर्चा होनी चाहिए कि:-

1. उन्होंने क्या पुरुषार्थ किया?
2. क्यों त्रेतायुग के बाद श्रीराम आज भी प्रासंगिक हैं?
3. क्यों मृत्यु के बाद निकलने वाले अंतिम यात्रा के समय हिन्दुओं में ‘राम नाम सत्य है’ बोला जाता है?
4. क्यों श्रीराम को आज भी पुरुषोत्तम कहकर पूजा जाता है?
5. क्यों आज जब भी आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श मित्र, आदर्श पति, आदर्श राजा, आदर्श समाज सुधारक, और आदर्श योद्धा की बात होती है तो केवल श्रीराम का ही नाम आता है?
6. आखिर सनातन संस्कृति में श्रीराम की अमिट छाप के पीछे क्या कारण हैं?

श्रीराम से जुड़े ऐसे अनेक पहलू हैं जिनपर शोध और चर्चा होनी चाहिए। वास्तव में भगवान श्रीराम ऐसे तुच्छ विवादों से बहुत परे हैं। इंडी-अलायन्स के नेताओं का ऐसे तुच्छ विवाद खड़े करना केवल और केवल 22 जनवरी 2024 को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर देश में बने राममय वातवरण में खलल डालकर लाइमलाइट लेने का कुटिल प्रयास मात्र है। इन नेताओं को वाल्मीकि रामायण का पूर्ण मनोयोग से अध्ययन करना चाहिए।