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Gyanvapi Mosque Case: SC आज फिर करेगा ज्ञानवापी मसले पर सुनवाई, पूजा और शिवलिंग के कार्बन डेटिंग की है अर्जी

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में पिछली बार 20 मई को सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने वाराणसी के जिला जज को केस ट्रांसफर कर दिया था। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हिंदू पक्ष का दावा कानूनन गलत है। इसे अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। उस मामले में जिला जज के यहां सुनवाई लगातार चल रही है।

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नई दिल्ली। यूपी के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में दाखिल हुई ताजा अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच इन अर्जियों पर सुनवाई करने वाली है। इन अर्जियों में मस्जिद परिसर में मिली शिवलिंग जैसी आकृति की पूजा की मंजूरी मांगी गई है। इसके अलावा कई और अपील भी की गई है। शिवलिंग जैसी आकृति की पूजा करने की 3 अर्जियां कोर्ट में 7 महिलाओं ने दाखिल की हैं। इनके नाम अमिता सचदेव, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक, प्रियंका गोस्वामी और पारुल खेड़ा हैं। इनके अलावा एक अर्जी राजेशमणि त्रिपाठी ने दाखिल की है।

Varanasi Gyanvapi Case

इनके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा कराते आ रहे व्यास परिवार के शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास की भी अर्जी दाखिल हुई है। व्यास ने दावा किया है कि मस्जिद का एक तहखाना उनके परिवार के नियंत्रण में था। वहां रोज पूजा होती थी। साल में दो बार रामचरितमानस का पाठ भी तहखाने में होता था। उनका कहना है कि 5 दिसंबर 1992 के बाद वहां जाने से उनको रोक दिया गया है। ऐसा करना प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के खिलाफ है। व्यास ने तहखाने में पूजा-पाठ का अधिकार वापस दिलाने की गुजारिश सुप्रीम कोर्ट से की है।

shivling gyanvapi masjid

वहीं, पूजा की मंजूरी मांगने वाली महिलाओं ने शिवलिंग जैसी आकृति की प्राचीनता का पता करने के लिए उसकी कार्बन डेटिंग कराने और आसपास ग्राउंड पेनीट्रेटिंग रडार से जांच कराने की मांग भी कोर्ट से की है। इसके अलावा आकृति के सामने कैमरा लगाकर लाइव स्ट्रीमिंग की मांग भी की है। उनका कहना है कि इससे भक्त नंदी की मूर्ति के पास बैठकर फिलहाल वहीं से पूजा कर लेंगे। बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद मामले में पिछली बार 20 मई को सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने वाराणसी के जिला जज को केस ट्रांसफर कर दिया था। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हिंदू पक्ष का दावा कानूनन गलत है। इसे अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। उस मामले में जिला जज के यहां सुनवाई लगातार चल रही है।

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