वाराणसी : नगर निगम ने घाटों के रखरखाव के लिए लिया एक बड़ा फैसला, अब धार्मिक आयोजनों के लिए देना होगा टैक्स

दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक है वाराणसी, इसे काशी भी कहा जाता है। हर दिन वाराणसी के घाटों पर पूजा पाठ, अनुष्ठान के साथ गंगा आरती और अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। ऐसे में वाराणसी नगर निगम ने घाटों के रखरखाव के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।

Avatar Written by: July 23, 2020 4:52 pm

वाराणसी। दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक है वाराणसी, इसे काशी भी कहा जाता है। ये शहर संसार के प्राचीनतम बसे शहरों में से एक और भारत का प्राचीनतम बसा शहर है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी की पहचान घाटों से है। हर दिन वाराणसी के घाटों पर पूजा पाठ, अनुष्ठान के साथ गंगा आरती और अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। ऐसे में वाराणसी नगर निगम ने घाटों के रखरखाव के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।

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वहीं अब गंगा किनारे होने वाले इन आयोजनों पर नगर निगम टैक्स वसूलेगा। गंगा आरती से लेकर घाट पर पूजा अनुष्ठान कराने वाले पंडो को अब टैक्स देना पड़ेगा। इसके अलावा, गंगा नदी में साबुन लगाकर नहाने पर पांच सौ रुपए जुर्माना लगेगा। नगर निगम के इस फैसले का समाजवादी पार्टी ने विरोध शुरू कर दिया है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि घाटों के रखरखाव के लिए अब गंगा घाट पर आयोजनों पर शुल्क लिया जा रहा है। आरती के आयोजकों को सालाना 5000 हजार तक का शुल्क देना होगा जबकि घाट के पंडों को 100 रुपया सालाना देना होगा। ठीक ऐसे ही वरुणा किनारे होने वाले आयोजनों पर भी शुल्क लगेगा। अपर नगर आयुक्त देवी दयाल वर्मा के मुताबिक रखरखाव को और बेहतर करने में शुल्क की व्यवस्था की गई है। ये बहुत ही नॉमिनल शुल्क है। इससे किसी को कोई परेशानी नहीं होगी।

जानें घाटों पर कौन से चार्ज लगेंगे

सांस्कृतिक आयोजन पर 4000, धार्मिक आयोजन के लिए 500 रुपए प्रतिदिन, 200 रुपए लगेगा। इसके अलावा यदि कोई सामाजिक आयोजन (संस्था द्वारा) शुल्क देना होगा। वहीं एक साल तक कोई आयोजन लगातार होगा तो 5000 वार्षिक शुल्क देना होगा। वहीं साबुन लगाकर कोई नहाते मिलेगा तो 500 रुपए,कचरा फेंकने पर 2100 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के जल निकासी पर 50 हजार से 20 हजार रुपए तक का शुल्क है।

सपा ने शुरू किया विरोध

प्रशासन के इस फैसले को लेकर काशी में विरोध शुरू हो गया है। सपा महानगर अध्यक्ष विष्णु शर्मा ने कहा धार्मिक आयोजन पर शुल्क बिल्कुल भी उचित नहीं है। पार्षद अवनीश यादव ने बताया कि हमारी संस्कृति घाटों से जुड़ी है। पूजा पाठ आरती पर शुल्क सुनकर ही लोगों मे रोष है। इसको हटाना होगा। तीर्थ पुरोहित जय प्रकाश का कहना है कि पहली बार ऐसा सुन रहे हैं। शुल्क के नाम पर उगाही ठीक नहीं है। पंडा भोनू मिश्रा ने बताया की लॉकडाउन में ऐसी ही कमाई खत्म हो गई है फिर शुल्क क्या दिया जाएगा।