
जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस के मसले पर अटकलों का बाजार गरम है। चर्चा इसकी है कि अपने पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि के दिन 11 जून को सचिन पायलट प्रगतिशील कांग्रेस के नाम से नई पार्टी का एलान कर सकते हैं। वहीं, कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा कह रहे हैं कि ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। इन अटकलों और रंधावा के खंडन के बीच सचिन पायलट ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। सचिन पायलट और उनके विरोधी सीएम अशोक गहलोत बीते दिनों कांग्रेस आलाकमान से मिले थे। जिसके बाद कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि गहलोत और पायलट मिलकर राजस्थान में कांग्रेस को चुनाव लड़ाएंगे। वहीं, सचिन पायलट ने कहा था कि उनकी मांगें अपनी जगह कायम हैं।

राजस्थान में साल 2020 से ही सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। 2020 में सचिन अपने कुछ समर्थक विधायकों समेत हरियाणा के मानेसर में जाकर बैठ गए थे। बड़ी मुश्किल से उस वक्त कांग्रेस आलाकमान ने उनको समझाया था। फिर लगातार सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच जुबानी जंग चलती रही। 25 सितंबर 2022 को कांग्रेस आलाकमान ने बतौर पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खरगे और अजय माकन को जयपुर भेजा था, लेकिन गहलोत समर्थक विधायकों ने बागी तेवर अपनाते हुए साफ कह दिया कि सचिन पायलट को वो सीएम के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे। नतीजे में खरगे और माकन दिल्ली लौट गए थे।
सचिन पायलट इसके बाद से ही गहलोत समर्थकों पर कार्रवाई, वसुंधरा राजे सरकार के दौरान कथित भ्रष्टाचार की जांच और पेपर लीक से परेशान युवाओं की मदद करने की मांग करते चले आ रहे हैं। वो एक दिन के अनशन पर भी बैठ चुके हैं। अजमेर से जयपुर तक की यात्रा भी सचिन पायलट ने की थी। वहीं, अशोक गहलोत भी सचिन के लिए नाकारा, बड़ा वाला कोरोना और गद्दार जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते रहे हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या 11 जून को सचिन पायलट कांग्रेस का हाथ झटकने वाला फैसला लेते हैं या अब भी अपने पक्ष में आलाकमान के किसी फैसले का इंतजार करते हैं।