अभिरंजन कुमार

अपने निर्भीक और बेबाक विचारों के लिए जाने पहचाने लेखक और पत्रकार अभिरंजन कुमार देश और दुनिया की राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों से लेकर धर्म और संस्कृति जैसे संवेदनशील सवालों को लेकर लगातार चिंतन-मनन-अध्ययन करते रहे हैं। उन्होंने ज़ी इंडिया से लेकर एनडीटीवी इंडिया तक अनेक चैनलों में तो काम किया ही है, P7 न्यूज, आर्यन टीवी (बिहार-झारखंड) और K News 24x7 (यूपी-उत्तराखंड) के संपादकीय प्रमुख भी रहे हैं। आजकल न्यूट्रल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक सह संपादक हैं। उनके चर्चित कविता संग्रहों में "उखड़े हुए पौधे का बयान", "बचपन की पचपन कविताएं" और "मीठी सी मुस्कान" दो शामिल हैं।

हमने पहले भी कहा था कि नाथूराम गोडसे के पैदा होने से कोई भी सभ्य समाज कलंकित ही महसूस करता है, लेकिन वह केवल महात्मा गांधी पैदा करने की गारंटी भी नहीं दे सकता। 10 लाख लोगों की लाशों पर इस्लाम के नाम पर हुआ देश-विभाजन हिंदुओं के चेतन-अवचेतन में ज़रूर रहता है और हमेशा रहना चाहिए।

मुफ्त और सब्सिडी की सूची विशुद्ध रूप से तार्किक और मानवीय आधार पर बनाई जानी चाहिए, वह भी केवल उतने समय के लिए, जितने समय के लिए वास्तव में उसकी ज़रूरत है।

याद रखिए, कोई भी सभ्य समाज अपने भीतर नाथूराम गोडसे के पैदा होने से कलंकित ही महसूस करेगा, लेकिन साथ ही वह केवल महात्मा गांधी पैदा करने की गारंटी भी नहीं दे सकता।

जो इस्लामिक 1947 में भारत में रह गए, उनके लिए हमारे मन में रत्ती भर भी निषेध नहीं है, लेकिन जो इस्लामिक थोक में दूसरे इस्लामिक मुल्कों से घुसपैठ करके भारत आ रहे हैं, उन्हें मानवता के नाते व्यक्तिगत केसों के आधार पर सीमित मात्रा में तो स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन थोक में नहीं।