Hathras Gangrape : परिजनों के भारी विरोध के बाद भी पुलिस ने कराया पीड़िता का अंतिम संस्कार

Hathras Gangrape : विरोध में लोग एंबुलेंस(Ambulence) के सामने रोड पर लेट गए। उनका कहना था कि, हमें मार दो लेकिन हम अंतिम संस्कार(Last Rites) नहीं करने देंगे। ग्रामीणों की पुलिसकर्मियों से धुक्का-मुक्की भी हुई।

Avatar Written by: September 30, 2020 8:26 am
Hathras case Ambulance

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के हाथरस में परिजनों के भारी विरोध के बाद भी पुलिस ने मंगलवार देर रात गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करा दिया। बता दें कि दिल्ली से आधी रात को पीड़िता का शव हाथरस पहुंचा था। जहां ग्रामीणों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश था। लोगों ने अपना भारी विरोध रखा लेकिन पुलिस ने उनकी एक ना सुनी और पीड़िता का अंतिम संस्कार करा दिया। सुरक्षा के लिहाज से पीड़िता के गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। शव जब आधी रात में गांव पहुंचा तो ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए राजी नहीं थे। इस पुलिस प्रशासन ने इसकी तैयारी पहले से ही कर ली थी और काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। जिसका नतीजा ये रहा कि भारी विरोध के बावजूद पीड़िता का अंतिम संस्कार करा दिया। गैंगरेप पीड़िता का शव रात में 12:45 हाथरस पहुंचा। एंबुलेंस को जब अंतिम संस्कार के लिए ले जाया रहा था तो लोगों ने उसे रोक दिया।

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एंबुलेंस पीड़िता के गांव के पास रात 2:35 बजे तक रुकी रही लेकिन रात में 2:45 बजे बार-बार असफल प्रयासों के बाद पुलिस ने एम्बुलेंस को अंतिम संस्कार के लिए रवाना कर दिया। इसके बाद पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया। गौरतलब है कि जब कल शव गांव पहुंचा तो पीड़िता के पिता और भाई के साथ डीएम और एसपी थे पीड़िता का शव लेकर जब एंबुलेंस जब गांव पहुंची तो लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने लगे और अंतिम संस्कार ना कराने की बात करने लगे।

विरोध में लोग एंबुलेंस के सामने रोड पर लेट गए। उनका कहना था कि, हमें मार दो लेकिन हम अंतिम संस्कार नहीं करने देंगे। ग्रामीणों की पुलिसकर्मियों से धुक्का-मुक्की भी हुई। विरोध करने वालों में महिला-पुरुष सब शामिल थे।

पीड़िता की मां चाहती थी कि शव को एक बार घर ले जाया जाय लेकिन पुलिस ने मां की भी नहीं सुनी और सीधे अंतिम संस्कार के लिए ले गई। एसपी और डीएम पीड़िता के पिता को अंतिम संस्कार के लिए राजी करने में जुटे रहे। मां बिलखने लगीं और कहने लगीं कि बेटी के शव को एक बार घर ले चला जाए। पुलिस दाह संस्कार के लिए परिजनों को समझाने का प्रयास करती रही। लेकिन परिवार के लोग शव को घर ले जाने के लिए अड़े रहे, हालांकि वो सफल नहीं हुए। इसके बाद 2:45 बजे भारी पुलिस तैनाती के बीच पीड़िता का दाह संस्कार कर दिया गया।

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इसके पहले पुलिस पर गैंगरेप पीड़िता के भाई का आरोप था कि एफआईआर के लिए उन्हें 8-10 दिन तक इंतजार करना पड़ा। पुलिस एक आरोपी को पकड़ती थी और दूसरे को छोड़ देती थी। काफी विरोध-प्रदर्शन के चलते आरोपियों को घटना के 10-12 दिन बाद पकड़ा गया। पीड़िता के भाई का आरोप था कि पुलिसवालों ने एंबुलेंस तक नहीं मंगा। बहन जमीन पर लेटी हुई थी। पुलिसवालों ने कह दिया था कि इन्हें यहां से ले जाओ। ये बहाने बनाकर लेटी हुई है।

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पूरा मामला

बता दें कि हाथरस के चंदपा थाना क्षेत्र में बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर की सुबह युवती अपनी मां के साथ खेत में चारा काट रही थी। चारा काटते-काटते वह अपनी मां से थोड़ी दूरी पर जा पहुंची। इसी बीच गांव के ही चार युवक लड़की को उसके दुपट्टे से खींचकर बाजरे के खेत में ले गए। जहां उन चारों ने उसके साथ दरिंदगी को अंजाम दिया। आरोपियों ने लड़की को बुरी तरह पीटा और मरा हुआ समझ कर भाग गए। लड़की की मां अपनी बेटी को ढूंढते हुए वहां पहुंचीं तो घटना का पता चला। लड़की को इलाज के लिए अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। 15 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गई।