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प्रलोभन युक्ति: शासन के AAP मॉडल की विचारधारा

आप का अभ्युदय भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के एक आंदोलन से हुआ था, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार मुक्त समाज व राजनीति थी। आंदोलन की प्रकृति के अनुसार यह वैचारिक रूप से एक असंगत आंदोलन था, जिसमें वामपंथ, समाजवाद और यहां तक कि स्वेच्छातंत्रवाद की पराकाष्ठा की परछाई साफ झलकती है।

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anxious arvind kejriwal

आम बोलचाल की भाषा में ‘‘प्रलोभन युक्ति’’ को सामानों के विज्ञापन से समझा जा सकता है। विज्ञापन प्रत्यक्ष तौर पर सौदबाजी है, जिसका लक्ष्य महंगे सामानों को बेचना और उसके एवज में पैसे ऐंठना है। उत्पादों की ऑनलाइन खरीददारी में हम में से कई लोगों ने यह अनुभव भी किया होगा कि जिस उत्पाद को हम खरीदते हैं वह वैसा नहीं होता है जैसा विज्ञापन में बताया या दिखाया गया होता है। बल्कि भिन्न और गुणवत्ता के विपरीत होता है। झूठे और उम्मीदों को पूरा ना करने वाले वादे करके उत्पाद या सामानों को बेचना ग्राहकों को धोखा देना है। इसका अर्थ ग्राहकों को बेहतर चीजें देने का प्रलोभन देना और फिर वास्तविक चीज ना देकर के उन्हें जाल में फंसाना भी होता है। दरअसल, यह मार्केटिंग का एक तरीका है जो निष्पक्षता, मार्केटिंग में नैतिकता और ब्रांड निर्माण की परीक्षा में पास नहीं कर सकता है। इसके पीछे ऐसा करने वाली कुछ कंपनियों का एकमात्र उद्देश्य अपने उत्पाद को बेचना होता है और इसके लिए वह ‘‘प्रलोभन युक्ति’’ की रणनीति अपनाते हैं ताकि वे मुनाफा कमा सकें। लोकतांत्रिक राजनीति में राजनीतिक दलों के भी कुछ इसी प्रकार के उद्देश्य होते हैं- पहला, चुनाव जीतना और दूसरा, मतदाताओं की वैधता और उनका विश्वास हासिल करना।

किसी राजनीतिक दल के पास हमेशा दो विकल्प उपलब्ध होते हैं:

पहला, राजनीतिक दलों द्वारा दीर्घकालीक रणनीति अपनाना, जिसमें उनकी विचारधारा और विचार सिर्फ मत हासिल करना नहीं बल्कि वैधता हासिल करना होता है। दूसरा, अल्पकालिक रणनीति जिसमें प्रलोभन की राजनीति के जरिए तत्काल और किसी भी कीमत पर लोगों का मत हासिल करना लक्ष्य होता है और इसका आधार ऐसे बड़े वादे होते हैं, जो पूरे नहीं किए जा सकते या शासन के रूप में खराब उत्पाद या सेवा की तरह होते हैं।

भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में यह देखा गया है कि पिछले 74 वर्षों में कई ऐसे राजनीतिक दल रहे हैं जो लोकलुभावनवाद और जनता को बहलाने वाली चीजों के आधार पर फलींफूलीं और सत्ता तक पहुंची लेकिन वे बहुत लंबे समय तक नहीं टिक सकीं क्योंकि उनकी कोई दीर्धकालिक नीतियां नहीं थीं और ना ही कोई दूरदृष्टि थीं। उन्होंने लुभावने और जनता को फांसने वाले मुद्दे उठाकर उनकी आकांक्षाओं को प्रोत्साहन दिया लेकिन बुरी तरह विफल हुए क्योंकि जो वादे किए वह उन्होंने पूरे नहीं किए। ऐसी ही एक घटना है आम आदमी पार्टी।

चलिए अब हम विचारधारा के आप के मॉडल पर चर्चा करते हैं जो कि प्रलोभन युक्ति की विचारधारा का उपयुक्त उदाहरण है। आप का अभ्युदय भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के एक आंदोलन से हुआ था, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार मुक्त समाज व राजनीति थी। आंदोलन की प्रकृति के अनुसार यह वैचारिक रूप से एक असंगत आंदोलन था, जिसमें वामपंथ, समाजवाद और यहां तक कि स्वेच्छातंत्रवाद की पराकाष्ठा की परछाई साफ झलकती है। दावा किया गया था कि यह आंदोलन राष्ट्रवाद, मिश्रित संस्कृति, वीआईपी-संस्कृति की मुखालफत और कल्याणकारी नीतियों पर आधारित होगा। इस जन आंदोलन को एक राजनीतिक दल के रूप में तब्दील कर दिया गया जिसे आम आदमी पार्टी के नाम से जाना जाता है।

सैद्धांतिक और अकादमिक रूप से आप की राष्ट्रवाद को लेकर कोई सुव्यवस्थित विचारधारा नहीं है क्योंकि उसका दावा है कि उसकी विचारधारा व्यवहारिक राजनीति की है और यह व्यवहारिक राजनीति ही उसका राष्ट्रवाद है। यह बगैर विचारधारा की पार्टी है। इसके संस्थापकों का कहना है कि उनकी एक ही विचारधारा है और वह है डिलिवरी करने की राजनीति। पारंपरिक दलों की राजनीति की प्रतिक्रिया के स्वरुप आम आदमी पार्टी का अभ्युदय हुआ। आप की राजनीति के मुख्य बिन्दुओं पर अगर हम गौर करेंगे तो पाएंगे कि इसने लोगों से एक बेहतर समाज, बेहतर राजनीति और बेहतर शासन का वादा किया था। उसके मुताबिक भ्रष्टाचार मुक्त समाज और राजनीति के अपराधीकरण पर अंकुश से ही इसे हासिल किया जा सकता है। उसका दावा है कि आप एक राजनीतिक दल नहीं है बल्कि आम-आदमी का एक आंदोलन है।

इसके बाद आप ने विकास का दिल्ली मॉडल का नारा गढ़ा, जो उसके मुताबिक पार्टी के संयोजक के कार्यकाल के दौरान अपनाई गई उसकी नीतियों का संचयी परिणाम है। दिल्ली मॉडल का दावा है कि इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसंरचना के क्षेत्र में व्यापक काम किया गया है। इसलिए आई हम आप के वादों और उन पर कितना अमल हुआ, उसकी चर्चा करते हैं। आप का पहला वादा स्वच्छ और बेहतर राजनीति का था। दिल्ली विधानसभा में आप के विधायकों (2020) और पंजाब में आप के विधायकों (2022) से जुड़ी कुछ विस्तृत जानकारी इस प्रकार है।

आप के कुल विधायक
दिल्ली 2020 62
घोषित आपराधिक मामले 38
आपराधिक मामलों का प्रतिशत 61
गंभीर आपराधिक मामले 33
गंभीर आपराधिक मामलों का प्रतिशत 53
पंजाब 2022 92
घोषित आपराधिक मामले 52
आपराधिक मामलों का प्रतिशत 52
गंभीर आपराधिक मामले 56
गंभीर आपराधिक मामलों का प्रतिशत 23
स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स, एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स और पंजाब इंलेक्शन वाच

वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में आप के 21 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले थे। पंजाब में 2022 में एक कैबिनेट मंत्री को भ्रष्टाचार के एक कथित मामले में बर्खास्त किया गया। ऐसी परिस्थिति की कल्पना कीजिए, जिसमें 61 प्रतिशत विधायकों में 56 प्रतिशत के खिलाफ आपराधिक मामले हैं तो वे समाज और राजनीति में किस प्रकार का प्रभाव पैदा करेंगे। इतना ही नहीं, आपराधिक मामलों में भ्रष्टाचार का एक जन्मजात तत्व होता है या तो मुद्रा के संदर्भ में या अन्यथा।

आप का दूसरा राजनीतिक दावा आम आदमी की पार्टी होने का है। निम्नलिखित आकड़े दर्शाते हैं कि यह कितनी आम आदमी की पार्टी है।
दिल्ली में आप के 2020 में विधायक 62
करोड़पति विधायकों की संख्या 45
करोड़पति विधायकों का प्रतिशत 73
62 विधायकों की औसत संपत्ति 14 करोड़ रुपये से अधिक

उपरोक्त आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि आम आदमी की पार्टी होने का दावा करने वाला दिल्ली और पंजाब का सत्ताधारी दल, जो खुद को कमजोर वर्गों और मातहतों की श्रेणी का प्रतिनिधि करने वाला बताता है, वह वास्तव में पूंजीवादी बुर्जुआ श्रेणी के अमीरों की कोठरी है।

आप का तीसरा राजनीतिक दावा भ्रष्टाचार मुक्त समाज और राजनीति का था। आप को मिली दान राशि का स्रोत पारदर्शी नहीं है और संदेहों के घेरे में है। मजेदार यह है कि हाल में पंजाब में निर्वाचत आप के एक कैबिनेट मंत्री को बर्खास्त करना पड़ा जब मुख्यमंत्री की जानकारी में यह बात सामने आई कि वह कमीशन ले रहे थे। दिल्ली में आप का एक कैबिनेट मंत्री धन शोधन निवारण अधिनियम का उल्लंघन करने के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय के अधीन कठघरे में है। उसके कई अन्य मंत्री भी विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों के राडार पर हैं।

आप का चौथा दावा जन कल्याण का था, जिसमें राजकोष के एवज में मुफ्त की चीजें जनता में बांटा जाता है। यह ऐसा वादा है जिससे जनता आकर्षित हो जाती है और मुफ्त की सुविधाओं को पाने के लिए मोहित होकर बदले में उनके पक्ष में मतदान कर देते हैं। आश्चर्यजनक रूप से पंजाब में जहां प्रति व्यक्ति ऋण एक लाख रुपये है और राज्य पर उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 53 प्रतिशत कर्ज है, वहां मतदाताओं को मुफ्त बिजली और हर महीने प्रत्येक महिला को 1,000 रुपये दिए जा रहे हैं। इसमें में किए गए वायदे और उस पर हो रहे अमल में बहुत बड़ा अंतर है।

पंजाब विधानसभा चुनाव में आप द्वारा 2022 में किए गए वादे और हो रहा अमल इस प्रकार है:

प्रलोभन का मुद्दा

मुफ्त बिजली, चौबिसों घंटे बिजली आपूर्ति लेकिन सिर्फ 600 यूनिट और वह भी विशेष श्रेणी के लोगों के लिए।

मुफ्त की चीजें: पंजाब की सभी व्यस्क महिलाओं के लिए प्रति महीने एक हजार रुपये। हालांकि पंजाब के मंत्रियों ने खुले तौर पर कहा है कि राज्य के पास वित्तीय कमियां हैं इसलिए यह तब दिया जाएगा, जब कोष उपलब्ध होगा।

एक महीने में भ्रष्टाचार खत्म का वादा: सिर्फ एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया गया और दावा किया गया कि पंजाब भ्रष्टाचार मुक्त हो गया।

कानून और व्यवस्था तथा गैगस्टरों का खात्मा लेकिन पंजाब के सबसे लोकप्रिय गायब को दिनदहाड़े मार दिया गया और आज वहां कानून व व्यवस्था की हालत सबसे खराब दौर में है। विश्व स्तरीय अवसंरचना और राज्य के नेतृत्व में निवेश लेकिन राज्य के पास कोष ही नहीं है।

जहां तक कि दिल्ली में आप के वादों और उस पर अमल किए जाने की बात है तो उसका जोर स्वास्थ्य पर रहा और उसके केंद्र में मोहल्ला क्लीनिक थे। लेकिन कोविड-19 की दूसरी लहर में यह सारी व्यवस्था ध्वस्त हो गई। इस सच्चाई के बावजूद कि आप दिल्ली की सत्ता पर पिछले सात सालों से काबिज है, देश की राजधानी ताजा आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के सबसे प्रदूषित और ना रहने लायक शहरों में है। दिल्ली में कोई अप्रत्याशित निवेश नहीं हुआ। और यहां तक दिल्ली की जनता बिजली और पानी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए आज भी संघर्ष कर रही है।

आप की रणनीति स्पष्ट है। जो सोचा नहीं जा सकता और जिसे हासिल नहीं किया जा सकता, उससे जनता को मोहित करो। इस प्रलोभन युक्ति को अपनाकर वोट के रूप में परिणाम हासिल करना। इसके बाद विज्ञापन का सहारा लेकर और उसकी मार्केटिंग करना ताकि जनता को लगे कि उन्हें उत्पाद के तौर पर सर्वश्रेष्ठ चीज मिली है। यही आप के शासन का दिल्ली मॉडल है, जिसे वह पूरे भारत में ले जाना चाहते हैं। यह सब मैं पाठकों के निर्णय की भावना पर छोड़ता हूं कि क्या वह इस प्रलोभन युक्ति को चाहती है।

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