
नई दिल्ली। कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना समेत विपक्षी दलों ने वक्फ संशोधन बिल का विरोध करने का फैसला किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की मौजूदगी में मंगलवार शाम को विपक्षी दलों के नेताओं ने बैठक की थी। बैठक में विपक्षी दलों ने वक्फ संशोधन बिल पर अपनी रणनीति बनाई। सूत्रों के मुताबिक विपक्ष ने ये तय किया है कि लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश होने पर उसकी तरफ से संशोधन दिए जाएंगे। ये संशोधन वही होंगे, जिनको विपक्षी सदस्यों ने वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान जेपीसी में दिया था और उनको नहीं माना गया था।
हालांकि, उम्मीद कम है कि विपक्ष के दिए संशोधनों को वक्फ संशोधन बिल में जगह मिल सकेगी। इसकी वजह ये है कि विपक्ष के पास लोकसभा में जरूरी संख्याबल नहीं है। लोकसभा में बहुमत के लिए जरूरी सांसदों की संख्या 272 है। चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के 16 और नीतीश कुमार की जेडीयू के 12 सांसदों समेत एनडीए के पास 293 सांसद हैं। कांग्रेस समेत विपक्ष के सांसदों की संख्या 233 है। अगर कुछ अन्य सांसद भी विपक्ष का साथ दें, तब भी उसके पक्ष में कुल 248 सांसद ही हो पाएंगे। इसी वजह से वक्फ संशोधन बिल में विपक्षी दलों की ओर से दिए जाने वाले संशोधन शामिल होना बहुत मुश्किल है। फिर भी संशोधन देकर विपक्ष ये दिखा सकता है कि हमने कोशिश की।
वक्फ संशोधन बिल के बारे में बनी जेपीसी के अध्यक्ष रहे जगदंबिका पाल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू विपक्ष पर लगातार आरोप लगा रहे हैं कि वो झूठ बोल रहा है। सरकार की तरफ से ये आरोप भी विपक्ष पर लगाया गया है कि वो मुस्लिमों को भ्रम में डाल रहा है। सरकार ने साफ कहा है कि मुस्लिमों की किसी भी वक्फ संपत्ति को कोई खतरा नहीं होगा। वहीं, मुस्लिम संगठन और मुसलमान नेता इस पर आपत्ति जता रहे हैं कि वक्फ संशोधन बिल के जरिए वक्फ बोर्डों में गैर मुस्लिम सदस्य की व्यवस्था क्यों की जा रही है? वे इस व्यवस्था को असंवैधानिक बता रहे हैं।