प्रो. रसाल सिंह

प्रो. रसाल सिंह प्रोफेसर और अध्यक्ष के रूप में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण का भी दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में पढ़ाते थे। दो कार्यावधि के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद के निर्वाचित सदस्य रहे हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सामाजिक-राजनीतिक और साहित्यिक विषयों पर नियमित लेखन करते हैं।

Common Entrance Test: स्तरीकृत और भेदभावपूर्ण स्कूली शिक्षा वाले घोर असमान समाज में सीमित अवसरों के न्यायपूर्ण वितरण के लिए एक निष्पक्ष और वस्तुपरक सामान्य मूल्यांकन ढांचा ही सर्वोत्तम विकल्प है। कम-से-कम एक इससे एक ऐसे सक्षम और व्यावहारिक समाधान की आशा की जा सकती है जो समाज, स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों की जरूरतों को पूरा करता है।

Dynastic Politics: गैर-कांग्रेसवाद और गैर-परिवारवाद का नारा देने वाले डॉ. राममनोहर लोहिया के उत्तराधिकारियों का ‘समाजवाद’ भी कांग्रेस से इतर नहीं है। समाजवादी आन्दोलन और सम्पूर्ण क्रांति से उद्भूत तमाम क्षेत्रीय दल या तो परिवार विशेष की निजी जागीर हैं या निजी कम्पनियां हैं।

पंजाब की देखा-देखी पश्चिम बंगाल विधान सभा ने भी प्रस्ताव पारित करके ‘केंद्र सरकार की सीमा सुरक्षा बल के क्षेत्राधिकार बढ़ाने संबंधी अधिसूचना' को खारिज कर दिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर उपरोक्त अधिसूचना को वापस लेने की मांग करते हुए ऐसा न करने की स्थिति में स्वयं उसे खारिज करने की धमकी दी थी।

UP Election 2022: प्रियंका गांधी की इन घोषणाओं से एक सवाल यह भी उठता है कि उनकी पार्टी यह घोषणाएं पंजाब, उत्तराखंड, गोवा या मणिपुर जैसे अन्य चुनावी राज्यों में क्यों नहीं कर रही है? क्या वहां की महिलाओं, किसानों और गरीबों को इसकी जरूरत नहीं है? जरूरत तो है लेकिन वहां कांग्रेस चुनावी गुणा-गणित में है।

Delhi University: दिल्ली विश्वविद्यालय की पहली कटऑफ में हुए दाखिलों के आंकड़े देते हुए इस आरोप का खंडन किया है। इस चैनल ने बताया है कि पहली कटऑफ के बाद कुल 31172 दाखिले हुए हैं। इनमें से केरल बोर्ड के 2365, हरियाणा बोर्ड के 1540 और राजस्थान बोर्ड के 1301 दाखिले हुए हैं।

Maha Vikas Aghadi govt: मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे क्या मुंबई और महाराष्ट्र में वीजा/पासपोर्ट और परमिट की व्यवस्था शुरू करना चाहते हैं? क्या वे भौगोलिक आधार पर चरित्र प्रमाण-पत्र जारी करते हुए क्षेत्र विशेष के लोगों को अपराधी घोषित करना चाहते हैं? क्या वे देश के अन्य राज्यों और शहरों में महाराष्ट्रवासियों के लिए इसी प्रकार की व्यवस्था और व्यवहार चाहते हैं?

Jammu-Kashmir: महबूबा एक के बाद एक बयान देकर अपना खोल, अपना मुलम्मा उतारने पर उतारू हैं। महबूबा के मन की बात गाहे-बगाहे उनकी जबान पर आ ही जाती है। इस धमकी के साथ ही उन्होंने एकबार फिर अनुच्छेद 370 की बहाली का बेसुरा राग अलापते हुए कहा कि सन् 1947 में यदि भाजपा होती तो जम्मू-कश्मीर कभी भारत का हिस्सा नहीं बनता। हालांकि, उनका यह बयान इतिहास और वर्तमान को सीमित और स्वार्थप्रेरित नज़रिये से देखना भर है।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने अपनी पार्टी के 22वें स्थापना दिवस (28 जुलाई) के अवसर पर फिर उत्तेजक, आपत्तिजनक और गैर-जिम्मेदाराना बयान देकर एकबार फिर आग भड़काने की साजिश की है।

प्रयागराज के नव-निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए उप्र के उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्या ने जो बात कही, वह गौरतलब और विचारणीय है।

J&K: 31 अक्टूबर, 2019 को जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक द्वारा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केन्द्रशासित प्रदेश बना दिए गए थेI इस महत्वपूर्ण संवैधानिक परिवर्तन के बाद कश्मीर केन्द्रित 6 दलों ने केंद्र सरकार के इस निर्णय के विरोध में पीपुल्स एलाइंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन का गठन किया थाI इस अवसरवादी और अपवित्र गठजोड़ को राजनीतिक गलियारों में गुपकार गैंग की संज्ञा दी गयीI