प्रो. रसाल सिंह
प्रो. रसाल सिंह

आपातकाल के दौरान दिल्ली में जगह-जगह बसी हुई झुग्गी बस्तियों को हटाने और 1982 में दिल्ली में आयोजित एशियाई खेलों और गुट-निरपेक्ष सम्मेलन के शानदार और सुव्यवस्थित आयोजन का श्रेय जगमोहन को जाता है।

रोहिंग्या घुसपैठिये मोहम्मद सलीमुल्ला ने ‘विख्यात’ वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर करते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन की इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की माँग की है। साथ ही, गृह मंत्रालय को यह निर्देश देने की भी माँग की गयी है कि वह अनौपचारिक शिविरों में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफ आर आर ओ) के माध्यम से तत्काल और तीव्र गति से शरणार्थी पहचान पत्र जारी करे ताकि इन ‘शरणार्थियों’ का उत्पीड़न न हो सके।

Pandit Premnath Dogra: पंडित प्रेमनाथ डोगरा और उनके अन्य साथियों को अनेक बार जेल में डाला गया, अनेक प्रकार की यातनाएं और प्रलोभन दिए गए, किन्तु उन्होंने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और संप्रभुता से समझौता नहीं किया। एकीकृत भारत उनका सबसे बड़ा स्वप्न था।

महत्वपूर्ण समस्या न्यायिक नियुक्तियों में होने वाली देरी है। गौरतलब है कि चार रिक्तियां होने के बावजूद उच्चतम न्यायालय में सितम्बर, 2019 के बाद से कोई नयी नियुक्ति नहीं हुई है। इसी प्रकार देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में 419 से अधिक रिक्तियां हैं। किन्तु वहां भी न्यायाधीशों की नियुक्ति की दिशा में कोई उल्लेखनीय और उत्साहजनक पहल नहीं की गयी।

पॉक्सो एक्ट ( Pocso Act) की यह परिभाषा इस अर्थ में विशेष रूप से ख़तरनाक और परेशान करने वाली है कि बच्चों पर होने वाले यौन हमलों से सम्बंधित मामलों में निचली अदालतों के लिए भविष्य में एक उदाहरण बन सकती है। यह परिभाषा इसलिए भी बेचैन करती है क्योंकि यह उत्पीड़ित के संरक्षण की जगह उत्पीड़क को संरक्षण प्रदान करती है।

कांग्रेस (Congress) की क्रमशः डूबती लुटिया के लिए सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) का धृतराष्ट्री पुत्रमोह जिम्मेदार है। उन्हें अपने सु-पुत्र और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के अलावा कोई अन्य नेता कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नहीं लगता। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष और जननेता के रूप में राहुल गांधी की योग्यता और क्षमता भारत-विख्यात है। दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनने को लेकर उनका ‘दोचित्तापन’ भी जगजाहिर है।

जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) में पहले गुपकार गठजोड़ चुनाव में भागीदारी को लेकर असमंजस में था, और चुनाव बहिष्कार की योजना बना रहा था, किन्तु बाद में उन्हें लगा कि कहीं चुनाव बहिष्कार करके वे भी अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की तरह अलग-थलग पड़कर अप्रासंगिक न हो जाएँ और ‘राजनीतिक स्पेस’ को नए खिलाड़ी घेर लें। इसलिए वे गठबंधन बनाकर पूरी मजबूती से यह चुनाव लड़ते हुए इन चुनाव परिणामों के माध्यम से कोई बड़ा राजनीतिक सन्देश देने की रणनीति पर काम कर रहे थे। वे अपने हमदर्द पाकिस्तान के साथ मिलकर अन्तरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर भारत-विरोधी दुष्प्रचार करना चाहते थे। लेकिन घोषित चुनाव परिणामों ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

J&K: जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) के नए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) ने ‘चलो गांव की ओर’ और ‘माइ सिटी, माइ प्राइड’ जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत करके शासन-प्रशासन को जनता से जोड़ने और उसे संवेदनशील बनाने की पहल की है। ये कार्यक्रम विकास योजनाओं में जनभागीदारी पर बल देने वाले हैं। सभी हितधारकों ख़ासकर आम नागरिकों में भरोसा पैदा करके और उन्हें साथ जोड़कर ही सरकारी योजनाओं का सफल कार्यान्वयन संभव है।

रोशनी एक्ट की आड़ में सरकारी भूमि की लूट का आलम यह था कि नैशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस जैसी पार्टियों के प्रदेश कार्यालय इसी एक्ट की आड़ में हथियाई गयी भूमि पर बने हैं। कांग्रेस-पीडीपी गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री रहे गुलाम नबी आज़ाद ने सैकड़ों करोड़ की सरकारी भूमि अपने चहेतों को कौड़ियों के भाव आवंटित कर दी।

New Education Policy: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) को लागू करने की दिशा में तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तमाम प्रस्तावों और प्रावधानों को अमलीजामा पहनाने के लिए न सिर्फ केन्द्रीय स्तर पर बल्कि राज्यवार ‘कार्य-समूह’ गठित किये जा रहे हैं। और भी कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।