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Gujarat Election: भगवान राम पर विवादित टिप्पणी कर बुरे फंसे शंकर सिंह वघेला

दरअसल, पूर्व सीएम शंकर सिंह वघेला ने कहा कि, ‘भगवान राम मंदिर में रहे या टाट में। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, बल्कि फर्क इससे पड़ता है कि गरीबों को रोटी मिली है की नहीं। गरीबों को भोजन और रोजगार मिल रहा है कि नहीं’। बता दें कि वघेला के उक्त बयान पर बीजेपी ने आपत्ति जताई है।

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नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक पार्टियां एक्शन मोड में आ चुकी है। बीजेपी अपने 27 साल के कार्यकाल का हिसाब देकर जनता जनार्दन को रिझाने में जुटी है, तो वहीं आम आदमी पार्टी सूबे की जनता से एक मौका मांग रही है। उधर, गाहे-बगाहे कांग्रेस की भी सक्रियता नजर आ रही है। ऐसे में जनता किसे अपनी रहनुमाई का मौका देगी। इसकी तस्वीर तो फिलहाल आगामी आठ दिसंबर यानी की नतीजे के दिन ही साफ हो पाएगी। उधर, गुजरात में चुनाव प्रचार के बीच पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वघेला ने भगवान राम को लेकर विवादित बयान दे दिया है, जिसे लेकर बीजेपी अब उन पर हमलावर हो चुकी है। आइए, आगे आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।

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दरअसल, पूर्व सीएम शंकर सिंह वघेला ने कहा कि, ‘भगवान राम मंदिर में रहे या टाट में। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, बल्कि फर्क इससे पड़ता है कि गरीबों को रोटी मिली है की नहीं। गरीबों को भोजन और रोजगार मिल रहा है कि नहीं’। बता दें कि वघेला के उक्त बयान पर बीजेपी ने आपत्ति जताई है। उनके इस बयान को बीजेपी ने विवादित बताया है। इसके अलावा उन्होंने सीएम अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा है।

आपको बता दें कि शंकर सिंह वघेला ने गुजरात चुनाव में सीएम केजरीवाल की सक्रियता पर भी तंज कसा है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल कभी नेता नहीं बन सकता है। कोई आईएएस या आईपीएस जैसे अफसर नेता नहीं बन सकता है, क्योंकि उसमें नेता बनने के गुण विद्ममान नहीं होते हैं। ध्यान रहे कि शंकर सिंह वघेला साल 1996 और 1997 में प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान रह चुके हैं। इसके अलावा वे 6 बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। 3 बार सांसद भी रह चुके हैं। वहीं, इस बार गुजरात चुनाव में भी उनकी सक्रियता देखने को मिल रही है।

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ध्यान रहे कि गुजरात में दो चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण की वोटिंग एक दिसंबर और दूसरे चरण की वोटिंग पांच दिसंबर को होगी। नतीजों की घोषणा आगामी 8 दिसंबर को होगी। उधर, चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों के सियासी सूरमा एक्शन मोड में आ चुके हैं। इसके अलावा बीजेपी की तरफ से पीएम मोदी ने भी मोर्चा संभाला हुआ है। राहुल गांधी सूबे के दौर में मसरूफ हैं। ऐसी स्थिति में सूबे में सत्ता का ऊंट किस करवट बैठता है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। तब तक के लिए आप देश-दुनिया की तमाम बड़ी खबरों से रूबरू होने के लिए पढ़ते रहिए। न्यूज रूम पोस्ट.कॉम

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