हृदय नारायण दीक्षित

चार्ल्स डारविन प्राकृतिक इतिहास और भूगर्भ शास्त्रीय खोज में विश्व यात्रा पर थे। भूकम्प आया। वह उठे, चक्कर आया, गिरे। उन्होंने इस अनुभव का निष्कर्ष “जरनल ऑफ रिसर्चेज” में लिखा, “भूकम्प पुराने से पुराने भावनात्मक सम्बंधों को नष्ट करता है।

लक्ष्यविहीन ज्ञान निरर्थक है। सर्वभूतहित संलग्नता में ही सच्चा सृजन है। भरत मुनि ने नाटक का उद्देश्य मनोरंजन के साथ सदाचार ही बताया है। यहां सदाचरण की स्थापना के लिए नाटक और कथा में नायक के चरित्र चित्रण की महत्ता रही है।

New Year:प्रकृति के अंश प्रतिपल बदलते रहते हैं। सो ग्रीष्म, शीत, वर्षा प्रतिपल नए हैं। देखने और अनुभव करने की भारतीय दृष्टि अखंड है। इसमें भूत और वर्तमान का भेद नहीं है। बीते और प्रत्यक्ष की समय विभाजक रेखा नहीं है। अस्तित्व प्रतिपल नया है।

ऋषि इन्द्र से कहते हैं- ”प्रार्थना सुनो, पुरोडास खाओ।“ (ऋ 4.32.16) जो इन्द्र को पुरोडास खिलाता है, उसे इन्द्र पापों से बचाते हैं (ऋ 8.31.2) वैदिक समाज का जौ, धाना, करम्भ, अपूप, पुराडास, दूध और घी प्रेम चारों वेदों में व्याप्त है। गोमांस का कहीं जिक्र ही नहीं। गाएँ श्रद्धा हैं। अन्न खाद्य है।

विविधता प्रकृति का नियम है। वैसे समूचा ब्रह्मण्ड एक इकाई है। कार्ल सागन जैसे विद्वान ने इसे ‘कासमोस’ कहा है। भारतीय चिंतन दर्शन में सम्पूर्ण प्रकृति को ब्रह्म कहा गया है। यह एक ब्रह्मण्ड ही भिन्न-भिन्न रूपों में हम सबकों दिखाई पड़ता है।

भारत की ऋषि परंपरा प्राचीन है। ऋषियों को मंत्र द्रष्टा कहा गया है। ऋषि अनेक हैं। सब संवादरत हैं लेकिन अनुभूति एक है। एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति। प0 दीनदयाल उपाध्याय आधुनिक काल के तत्वद्रष्टा ऋषि हैं। उन्होंने एकात्म मानव दर्शन का विचार दिया।

मनुष्य जीवन में सौन्दर्य का महत्व है। सौन्दर्य कला का मुख्य तत्व है। कलात्मक सृजन के लिये भी मूल ध्येय सौन्दर्य है। सौन्दर्य का सृजन कला का मूल कर्म है। उपनिषदों में कहा गया है कि बलहीन को आत्म उपलब्धि नहीं होती। सृजन पुष्ट शरीर द्वारा ही संभव है।

ध्वनि का रूप नहीं होता। संसार रूपों से भरापूरा है। समाज रूप को नाम देता है। नाम शब्द ध्वनि होते हैं। भारतीय चिंतन में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। प्रत्येक शब्द का अर्थ होता है। प्रत्येक शब्द ध्वनि होता है। ध्वनि के रूप का अर्थ निश्चित हो जाने के बाद शब्द का जन्म होता है। शब्दों के व्यवस्थित प्रयोग से भाषा बनती है।

वायु प्रदूषण से राष्ट्रीय बेचैनी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हालत बहुत चिंताजनक है। यही स्थिति कमोवेश सभी महानगरों में है। वायु प्राण हैं। प्राण नहीं तो जीवन नहीं। वैदिक परम्परा में वायु अमर देव हैं। वायु से आयु है।

भारत की स्वधीनता अनेक महत्वपूर्ण नेताओं व लाखों लोगों के संघर्ष का परिणाम है। सरदार पटेल इस आंदोलन के प्रमुख स्तम्भ थे। अंग्रेज स्वधीनता संग्राम और विषम अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के दबाव में भी भारत छोड़ने को विवश हुए।