हृदय नारायण दीक्षित

स्वास्थ्य सुख है और रोगी होना दुख। यह मान्यता भारतीय आयुर्विज्ञान की है। संक्रामक रोगों के रोगी को अलग रखे जाने की जरूरत अथर्ववेद के रचनाकाल में भी थी।

सुख सबकी कामना है। सामान्यतया अपने वातावरण व समाज की अनुकूलता सुख व प्रतिकूलता दुख कही जाती है लेकिन आयु-विज्ञान के महान ग्रंथ चरक संहिता में सुख और दुख की विशेष परिभाषा की गई है।

प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी को लेकर राष्ट्र को सावधान किया है। उन्होंने अपने 25 मिनट के भावुक सम्बोधन में प्रत्येक नागरिक से सजगता की अपील की है। उन्होंने इस महामारी से निश्चिंत होकर घूमने को उचित नहीं बताया है।

मन अप्रत्यक्ष है। दिखाई नहीं पड़ता। यह मनुष्य के व्यक्तित्व की अंतः शक्ति है। मन के अध्ययन, विवेचन व विश्लेषण पर विश्वव्यापी मनोविज्ञान विकसित हुआ है। भारतीय दर्शन में मनः शक्ति की जानकारी ऋग्वेद के रचनाकाल से ही मिलती है। ऋग्वेद में मन भी एक देवता हैं।

प्रत्येक व्यक्ति का मन होता है। सामूहिक जीवन के प्रभाव में समान मन के कारण समाज का भी मन होता है। तब व्यक्तिगत मन सामूहिक मन का भाग हो जाता है।

आदिमकाल में राजा या राज्य व्यवस्था नहीं थी। राज्य संस्था का क्रमिक विकास हुआ है। अथर्ववेद में राज्य के जन्म और विकास का सुन्दर वर्णन है। बताते हैं “पहले विराट (राजा-राज्य रहित) दशा थी, इस में विकास हुआ। गार्हृपत्य संस्था (परिवार-कुटुम्ब) आई।

राष्ट्र प्राचीन वैदिक धारणा है और नेशन आधुनिक काल का विचार है। राष्ट्र के लिए अंग्रेजी भाषा में कोई समानार्थी शब्द नहीं है। ई0एच0 कार ने नेशन की परिभाषा की है, “सही अर्थो में राष्ट्र्रो या नेशंस का उदय माध्यकाल की समाप्ति पर हुआ।”

काम कामनाओं का बीज है। यह प्रकृति में सर्वव्यापी है। प्राकृतिक है। प्रकृति की सृजनशक्ति है। प्रत्येक शक्ति का नियमन भी होता है। नियमविहीन शक्ति अराजकता में प्रकट होती है। फिर काम को विराट शक्ति जाना गया है।

भूमि और सभी प्राणी परस्पर अन्तर्सम्बन्धित हैं। यह नेह मां और पुत्र जैसा है। वैदिक साहित्य में इस सम्बंध का अनेकशः उल्लेख है। वैदिक ऋषि पृथ्वी को बार-बार नमन करते हैं। अथर्ववेद (भूमि सूक्त, 12.26 व 27) में कहते हैं, “इस भूमि की सतह पर धूलिकण हैं, शिलाखण्ड व पत्थर हैं।

कविता और विज्ञान एक साथ नहीं मिलते। काव्य में भाव अभिव्यक्ति की प्रमुखता होती है और विज्ञान में प्रत्यक्ष सिद्धि की। विज्ञान में पृथ्वी सौर मण्डल का ग्रह है। पृथ्वी पर तमाम वस्तुएं, खनिज, वनस्पतियां और जल पृथ्वी का भाग है।