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हृदय नारायण दीक्षित

Importance of Books : विश्व की सभी सभ्यताओं में पुस्तकों का आदर (Respect Books) किया जाता है। पुस्तकों (Books) में वर्णित जानकारियां लेखक के कौशल से सार्वजनिक होती हैं। शब्द स्वयं में सार्वजनिक संपदा है।

लोक (World) की व्याप्ति बड़ी है। सामान्यतया प्रत्यक्ष विश्व (Direct world) को लोक कहते हैं। लेकिन भारतीय परंपरा (Indian tradition) में कई लोकों की चर्चा है।

अस्तित्व (Existence) विराट है। इसकी अपनी गतिविधि है। अस्तित्व के अंश (Parts of existence) भी इसी के भीतर अपने-अपने प्रेम से सक्रिय हैं। अस्तित्व की अनुकंपा से ही जीवन में शुभ या अशुभ घटित होता है। भविष्य में सुख मिलने या अच्छे दिन की आशा प्रतीक्षा बनती है। प्रतीक्षा गहन आस्तिक भाव (Waiting intense believer) है।

इतिहास (History) मार्गदर्शक होता है और संस्कृति प्रेरक। इतिहास की गलतियां सबक सिखाती हैं। संस्कृति के प्रेरक तत्व उत्सव बनते हैं। 15 अगस्त (Independence Day) भारतीय स्वाधीनता (Indian independence) का महोत्सव है।

आदि कवि वाल्मीकि ने भारतीय इतिहास के मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम का चरित्र चित्रण किया। रामकथा की धूम मच गई। ऐसा पुरूषोत्तम बस एक है। विश्व इतिहास में श्रीराम जैसा दूसरा महानायक नहीं है। वह इतिहास में हैं, इतिहास से परे।

ऋग्वेद के प्रति पूरे एशिया महाद्वीप में विशेष प्रकार का आदरभाव है। अमेरिकी विद्वान भी वेदों के प्रति उत्सुक हैं। ब्लूमफील्ड ने अथर्ववेद का अनुवाद किया है। जर्मन विद्वान मैक्समुलर ने ऋग्वेद का भाष्य किया है। भारत के लिए वेद वचन ईश्वर की वाणी हैं।

आधुनिक विश्व में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की महत्ता है। सही भी है। दर्शन और विज्ञान अंधविश्वासों से मुक्त करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सोचने वाले लोग पंथिक आस्था और विश्वासों को लेकर प्रश्न उठते हैं। अनेक प्रगतिशील विद्वान भारत के धर्म को भी विश्वास की श्रेणी में रखते हैं। वे वेदों को भी अविश्वास की श्रेणी में रखते हैं। लेकिन वेद जीवन अनुभूति की कविता है।

शिव भारतीय देव अनुभूति के निराले देवता हैं। बाकी सब देव हैं। शिव महादेव हैं। वैदिक देव सोम वनस्पति के राजा हैं। शिव अपने मस्तक पर सोम धारण करते हैं। पौराणिक शिव के गले में सांपों की माला है। वे विषपायी भी हैं। ऋग्वेद के देवता हैं रूद्र। वे तीन मुंह वाले हैं। रूद्र, 'त्रयम्बकं यजामहे सुगंन्धिं पुष्टि वर्धनम्'-पोषण संवर्धन करते हैं।

तमाम अभावों के बावजू ग्राम निवासियों के मन में गांवों का आकर्षण है। कोरोना महामारी के प्रकोप के समय महानगरों में मजदूरी करने वाले ग्रामीण गांवों की ओर भागे। इनकी संख्या लाखों में थी। हजारों प्रवासी पैदल भी लंबी यात्रा करते देखे गए थे।

प्रकृति आलस्य नहीं करती। प्रकृति की शक्तियां निरंतर सक्रिय रहती है। सूर्य आलस्य नहीं करते। पृथ्वी प्रतिपल नृत्यमगन है और चंद्र भी। सोम और चन्द्र पर्याय भी माने जाते हैं। चन्द्रमा विराट पुरूष का मन कहा गया है। मन कभी आलस्य नहीं करता। मन सतत् सक्रिय रहता है। ऋग्वेद अथर्ववेद में सोमलता का उल्लेख है।