Thursday, February 22, 2018

प्रश्न हमारी मनोभूमि को किसान की तरह खोदते हैं…

उपनिषद् अनूठे हैं। आनंद का ऐसा आख्यान भारत छोड़ अन्यत्र नहीं मिलता। प्राचीन यूनानी दर्शन में बेशक उपनिषदों जैसी अभिव्यक्तियां हैं। लेकिन वे ज्ञान...

पृथ्वी का प्राण सूर्य है

ठंड को भी भारी ठंड लगी है। ईसा के नए साल की जनवरी बहुधा कोहरे का कम्बल ओढ़ कर आती है। संप्रति सर्दी ठिठकी ठिठकी...

 ‘आहार’ व्यक्तित्व का आधार है

भूख स्वाभाविक इच्छा है। यह हमारी योजना का परिणाम नहीं है। भोजन बिना शरीर नहीं चलता। सो प्रकृति ने हम सबके शरीर में ‘भूख’...

भारतीय अनुभूति का ‘पूर्ण’

कुंभ के बहाने “पूर्ण व अर्द्ध” पर संप्रति दिलचस्प चर्चा है। अर्द्ध संख्यावाची है और पूर्ण भारतीय दर्शन की अनूठी खोज है। ‘पूर्ण’ असीम...

प्रेम सनातन प्यास है।

प्रेम सनातन प्यास है। पोथियां भरी पूरी है प्रेम से और प्रेम के गीतों से भी। लेकिन मनुष्य कि प्यास नहीं बुझती। सुना है...

इसे देखकर आप भी ये मानेंगे ही नहीं बल्कि कहेंगे भी कि ऐसा होना...

गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी की धड़ाधड़ होती रैलियों ने वहां के चुनाव को काफी रोचक बना दिया था। इस सब के...

मनुष्य में अनंत संभावनाएं हैं

मनुष्य में अनंत संभावनाएं हैं। भारतीय दृष्टिकोण में इकाई से अनंत होने की क्षमता। पौराणिक शैली में नर से नारायण होने की संभावना। ऐसा विचार...

ब्रह्माण्ड विराट है।

नई दिल्ली। भारतीय चिन्तन का ‘विराट’ बड़ा रम्य है और रहस्यपूर्ण भी है। यह ज्ञात विश्व से भी बड़ा है। इसका बड़ा भाग अज्ञात...

ज्ञान का मूल जिज्ञासा है

ज्ञान के इच्छुक जिज्ञासु कहे जाते हैं। हमारे सामने विषय होते हैं। जिज्ञासु विषय जानने की इच्छा रखते हैं। ज्ञान का लक्ष्य ज्ञेय कहा...

सृजन प्रकृति का स्वभाव है

विश्व एक है। अस्तित्व अखण्ड है। सारे सामाजिक विभाजन मनुष्य के सचेत या अचेत कर्मों का परिणाम है। सचेत मनुष्य प्रकृति के अंतरंग का...

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