Saturday, April 21, 2018

आस्तिकता जीवन का सौन्दर्य है और यथार्थवाद जीवन का सत्य

अस्तित्व पूर्ण है। इसका प्रकट भाग पूर्ण है और अप्रकट भी। प्रकृति इसकी पूर्ण अभिव्यक्ति है। इसलिए पूर्णता का आस्वाद भी आनंददायी होना चाहिए।...

प्रकृति सुसंगत व्यवस्था है

प्रकृति सुसंगत व्यवस्था है। यह अपनी अव्यवस्था को भी अल्पकाल में पुनर्व्यवस्थित करती है। प्रकृति की गति की एक लय है। हमारी सुखानुभूति प्राकृतिक...

संवाद समाज के गठन का मूल आधार है

अस्तित्व रहस्यपूर्ण है। सृष्टि का उद्भव हजारों साल से विश्व जिज्ञासा है। भारतीय इतिहास के वैदिक काल में भी सृष्टि उद्भव पर असाधारण जिज्ञासा...

निद्रा रहस्यपूर्ण है

निद्रा रहस्यपूर्ण है। निद्रा और जागरण के संसार भी भिन्न है। हम जागते हुए इसी दुनिया में होते हैं, इसी विश्व का लोकव्यवहार करते...

होली प्रकृति का सौन्दर्य है

होली आई। गई। होली प्रकृति का सौन्दर्य है। साधारण नहीं। अति साधारण। तब प्रकृति अपनी पूरी आभा से खिलती है। यह निरपेक्ष होकर स्वयं...

जीवन की मुख्य धारा प्राण शक्ति है

प्राण विश्वधारक दिव्यता हैं। प्राण का घनत्व ही जीवन का गाढ़ापन है। यह प्राण ही शरीर के सभी अंगों में जीवनशक्ति का संचार करता...

प्राण नहीं तो जीवन नहीं

प्राण नहीं तो जीवन नहीं। संसार प्राणमय है। वैदिक साहित्य में प्राण की प्राणवान स्तुतियां हैं। प्रश्नोपनिषद् (2.5) में कहते हैं “ये प्राण अग्नि...

सूर्य के कारण ही युग वर्ष मास और दिन-रात होते हैं

संसार कर्म क्षेत्र है। कर्म की प्रेरणा का केन्द्र इच्छा है। कर्मफल प्राप्ति की इच्छा कर्म कराती है। इच्छाएं अनंत हैं। सारी इच्छाएं पूरी...

बजट में 2019 चुनाव पर नजर, किसानों, आम आदमी को राहत

वर्ष 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले अपने अंतिम बजट में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर वर्तमान के...
PM Narendra Modi

पद्मावत मामले पर चुप क्यों हैं पीएम?

हाल ही में हमने ऐसी घटनाओं को देखा जो किसी भी देश या समाज के लिए बहुत व्यथित कर देने वाली बात हो सकती...

ताजा खबरें