पंडित दयानन्द शास्त्री

पंडित दयानन्द शास्त्री का मानना है कि शीत ऋतु में चतुर्थ व पंचग्रही युति का प्रभाव मौसम में स्पष्टरूप से देखने को मिलेगा। जनवरी 2020 से मौसम में विचित्र परिवर्तन दिखाई देगा। पहाड़ों पर बर्फबारी के साथ मैदानी इलाकों में मघावट जैसी बारिश व ओला वृष्टि होगी।

आज (शुक्रवार - 28 दिसंबर 2019) से शनि का राशि परिवर्तन ज्योतिष अनुसार एक बड़ी घटना मानी जा रही है क्योंकि इसका प्रभाव सभी लोगों पर कुछ न कुछ जरूर होने वाला है। कर्म फल दाता शनि जब अपनी राशि बदलते हैं तो किसी पर शनि साढ़े साती तो किसी पर ढैय्या शुरू हो जाती है।

इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनेगी। इसका कारण यह है कि सूर्य देव 14 जनवरी रात 2:08 बजे उत्तरायण में होंगे यानि सूर्य देव धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी वजह से सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने का पर्व संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी सुबह से शुरू होगा।

थोड़ा संयमी व धैर्यवान बने। भाग्य से प्राप्त अच्छे-बुरे सभी परिस्थितियों के साथ समझौतावादी बनें। कुछ नई व्यस्तताएं सामने आएंगी। महत्वपूर्ण दायित्वों की पूर्ति हेतु प्रयत्न तीव्र होगा।

सोमवार यानि 16 दिसंबर 2019 को सूर्य धनु राशि में प्रवेश किया, जोकि 15 जनवरी 2020 तक इसी राशि में विराजमान रहने वाले हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार 15 जनवरी तक सूर्य देव गुरु बृहस्पति के सेवा में रहेंगे।

यदि जन्मकुंडली मांगलीक होगी तो विवाह होकर भी तलाक हो जाता है। किन्तु ध्यान रहे किसी भी हालत में सप्तमेश को वर्गोत्तम नहीं होना चाहिए।

उतारे की वस्तु सीधे हाथ में लेकर नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर की ओर सात अथवा ग्यारह बार घुमाई जाती है। इससे वह बुरी आत्मा उस वस्तु में आ जाती है।

यदि जीवन रेखा, हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा तीनों प्रारंभ में मिली हुई हो तो व्यक्ति भाग्यहीन, दुर्बल और परेशानियों से घिरा होता है।

कुर्मा पुराण के अनुसार कुंभ उत्सव में स्नान करने से सभी पापों का विनाश होता है, और मनोवांछित फल प्राप्त होता है। यहां स्नान से देव लोक भी प्राप्त होता है। भविष्य पुराण के अनुसार कुंभ स्नान से पुण्य स्व स्वरुप मिलता है, और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और इसमें चावल, लाल फूल, लाल चंदन भी डालें। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके सूर्य देव को अर्घ्य चढ़ाएं। इस दौरान सूर्य मंत्र ‘ऊँ सूर्याय नम:’ का जाप करें।