पंडित दयानन्द शास्त्री

ज्योतिष में रोग और शत्रु की बात करे तो ज्योतिष में 6ठे भाव से रोग का विचार किया जाता है और भावेत , भावम के सिद्धान्त से 6 से 6 मतलब 11 भाव से भी रोग का विचार किया जाता है।

शरीर के इन अंगों पर यदि छिपकली गिरती हैं तो बनते हैं करोड़पति। शकुन शास्त्र के अनुसार छिपकली के शरीर पर गिरने को भी शकुन/ अपशकुन माना जाता है।

प्राचीन चिकित्सा शास्त्र के ग्रंथों में कहा गया है कि प्रत्येक बीमारी की जड़ पेट ही होता है। पेट के रोगों की शुरुआत कब्ज से होती है। इस कब्ज का यदि समय रहते उपचार न हो, तो व्यक्ति अल्सर, गैस डाइबिटीज या बवासीर से ग्रस्त हो सकता है।

ज्योतिष शास्त्र ग्रहों के चलन, उनके समागम या वियोग से सामान्य जन जीवन, पृथ्वी व मनुष्य जाति पर होने वाले शुभाशुभ प्रभावों का निर्धारण तथा उससे होने वाले परिवर्तनों (सुख-दुख) का ज्ञान कराता है।

चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को भारतवर्ष में हिंदू संप्रदाय राम के जन्मदिन यानि की रामनवमी के रुप में मनाता है। रामनवमी का त्यौहार चैत्र शुक्ल की नवमी को मनाया जाता है, इस पर्व को सच्ची श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

विगत 22 मार्च 2020 से शनि एवम मंगल का एक साथ होना व 30 मार्च 2020 से गुरु नीच का अतिचारी होकर मकर राशि में 30 जून तक विचरण करना इस रोग की प्रबलता में वृद्धि करेगा।

ऐसा माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का जन्म हुआ था और मां दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्णाण कार्य शुरू किया था। इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदुओं के नव वर्ष की शुरुआत भी हो जाती है।चैत्र नवरात्र के दिनों में ऋतु परिवर्तन होता है और गर्मी के मौसम की शुरूआत होती है।

नई दिल्ली। इस रविवार 22 मार्च 2020 को राहू का नक्षत्र है। 22 तारीख मतलब फिर से राहू, कोई भी...

ज्योतिषशास्त्र में शनि ग्रह का विशेष स्थान है। शास्त्रों में शनि को संतुलन व न्याय का ग्रह माना गया है। कई ज्योतिशविदों ने शनि को क्रोधी ग्रह भी माना है और यदि किसी व्यक्ति से कुपित हों जाए तो व्यक्ति के हंसते-खेलते संसार को बर्बाद भी कर देता हैं। इस संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो शनि के प्रभाव से अछूता हो।

चैत्र नवरात्रि के लिए घट स्थापना 25 मार्च को होगी। इसके लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 19 मिनट से लेकर 07 बजकर 17 मिनट तक है। हिंदी पंचांग के मुताबित भारतीय नववर्ष की शुरू भी चैत्र प्रतिपदा से होती है। इसके अलावा चैत्र महीने में ही नवसंवत्सर की भी शुरुआत होती है।