पंडित दयानन्द शास्त्री

राहु के फैलाये हुए जाल से भारत बाहर निकलेगा। राहु मायाजाल है, प्रभावी गृह(छाया) है और अब तक अपने स्व नक्षत्र आर्द्रा में था तो उसकी यह ताकत बढ़ी हुई थी। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की विगत 22 अप्रैल 2020 की सुबह 8 बज कर 51 मिनट पर स्पष्ट राहु आर्द्रा अक्षत्र को छोड़ कर मृगशिरा में आ गए थे, इसी क्रम में कल, 20 मई 2020 की दोपहर बाद 3 बजकर 25 मिनट पर मध्यम राहु भी आर्द्रा अक्षत्र को छोड़ कर मृगशिरा नक्षत्र में आ गए हैं। कोरोना पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति एक अच्छा जीवन जीता है तो उसको जीवन में तीन बार शनि की दशा से गुजरना पड़ता है। पहली बार शनि व्यक्ति के साथ खेलता है, दूसरी बार उसकी जिन्दगी में भूचाल लाता है, और तीसरी बार उसके सारे धन-दौलत को नष्ट कर देता है। यही कारण है कि लोग शनि को शांत रखने का प्रयास करते रहते हैं।

ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'अपरा एकादशी' कहा जाता है। इसका व्रत रखने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस बार यह एकादशी आज 18 मई 2020 को मनाई जा रही है। पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से कई पापों का नाश होता है। इसका व्रत सुहागिनों के लिए सौभाग्य लेकर आता है। 

11 मई, 2020 को शनिदेव अपनी मार्गी चाल को छोड़ कर वक्री होने जा रहे हैं। 142 दिनों तक यानि 29 सितंबर तक वे इसी अवस्था में रहेंगे तत्पश्चात वे फिर से मार्गी हो जाएंगे।

दिनांक 21 जून 2020 को आषाढ़ अमावस्या (रविवार) के दिन कंकण आकृति सूर्य ग्रहण समस्त भारत में दिखाई देगा लेकिन इसकी कंकण आकृति भारत के कुछ स्थानों पर ही दिखाई देगी।

भारतीय हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास सृष्टि की शुरुआत के पंद्रह दिन बाद शुरू होता है। यह पवित्र महीना व्यक्ति को व्यक्ति से समुदाय में उन्मुख होने के लिए प्रेरित करता है। पुराणों में इस महीने को जप, तप, दान का महीना कहा गया है।

किसी जातक के जीवन के बारे मे जानकारी प्राप्त करने हेतु ज्योतिष शास्त्र मे जन्म कुंडली का अध्ययन कर बताया जा सकता है कि जातक का सम्पूर्ण जीवन कैसा रहेगा।

ज्योतिष में रोग और शत्रु की बात करे तो ज्योतिष में 6ठे भाव से रोग का विचार किया जाता है और भावेत , भावम के सिद्धान्त से 6 से 6 मतलब 11 भाव से भी रोग का विचार किया जाता है।

शरीर के इन अंगों पर यदि छिपकली गिरती हैं तो बनते हैं करोड़पति। शकुन शास्त्र के अनुसार छिपकली के शरीर पर गिरने को भी शकुन/ अपशकुन माना जाता है।

प्राचीन चिकित्सा शास्त्र के ग्रंथों में कहा गया है कि प्रत्येक बीमारी की जड़ पेट ही होता है। पेट के रोगों की शुरुआत कब्ज से होती है। इस कब्ज का यदि समय रहते उपचार न हो, तो व्यक्ति अल्सर, गैस डाइबिटीज या बवासीर से ग्रस्त हो सकता है।