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उत्तर प्रदेश के बीएचयू स्थित संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के फिरोज खान की नियुक्ति और इसके विरोध का प्रकरण अब और विवादित होता नजर आ रहा है। इस मामले में बसपा मुखिया मायावती अब फिरोज खान के समर्थन में उतर आई हैं। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन का ढुलमुल रवैया ही मामले को बेवजह तूल दे रहा है।

पार्टी का एक धड़ा चुनाव लड़ने की सलाह दे रहा है तो दूसरा धड़ा इस चुनाव से तौबा कर सीधे वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में तैयारी के साथ आने की बात कर रहा है। इस पर निर्णय मायावती को लेना है, मगर वह अभी इस मामले पर चुप हैं।

दिसंबर, 1992 में विवादित ढांचा विध्वंस करने के बाद से मुसलमानों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अछूत हो गई थी। समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इसका भरपूर लाभ उठाया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिमों ने फैसले को कुबूल कर लिया, दोनों ने गलबहियां भी कीं। इससे विपक्ष के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

एक के बाद दूसरी हार से चरमराई बहुजन समाज पार्टी में बड़ा बदलाव किया गया है। बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने इस बदलाव के तहत पार्टी का पूरा ढांचा ही बदल दिया है। पार्टी के भीतर सालों से चली आ रही जोनल व्यवस्था को खत्म कर दिया है। बीएसपी को अब सेक्टरों में बांट दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम घोषित हो गए हैं। इसमें भाजपा ने 8 और सपा ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की है। समाजवादी पार्टी ने रामपुर के अलावा जलालपुर और जैदपुर पर सीट जीतकर अपने विधायकों की संख्या में इजाफा किया है

जानकारी के मुताबिक, राम जी गौतम सुबह जब मॉर्निंग वॉक पर वह 8:30 बजे पार्टी दफ्तर आ रहे थे तभी हाथों में BSP का झंडा लिए भरतपुर से आए कार्यकर्ताओं ने उन्हें पकड़कर पहले तो पीटा और फिर मुंह काला कर

हरियाणा के पूर्व मंत्री और तीन बार के विधायक करतार सिंह भड़ाना शुक्रवार को बहुजन समाज पार्टी(बसपा) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) में शामिल हो गए। पार्टी के महासचिव अरुण सिंह ने भाजपा मुख्यालय में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बुधवार को कांशीराम को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्घांजलि अर्पित की। इस दौरान बसपा प्रमुख ने उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लिया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब धीरे-धीरे विपक्ष का किला ढहाने में जुट गई है। विधानसभा के विशेष सत्र का बहिष्कार कर विपक्ष ने भले ही भाजपा के अभियान को फीका करने का प्रयास किया हो, मगर कांग्रेस, बसपा और सपा के बागी विधायकों की सदन में मौजूदगी ने विपक्ष के बहिष्कार अभियान को पलीता लगाया है।

लखनऊ कैंट और जलालपुर इन दोनों ही सीटों पर 13-13 प्रत्याशी मुकाबले में हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही यूपी की 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना तय हो गया था।