BSP

30 मई 2019 को जैसे ही नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 का गठन हुआ। उसके बाद से ही सरकार की तरफ से जनहित में कई फैसले बड़ी तेजी से लिए गए।

उत्तर प्रदेश के बस पॉलिटिक्स का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने यूपी सरकार को 36.36 लाख रुपये का बिल भेजकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।

मोहसिन रजा ने कहा कि सीएम योगी ने कहा था कि हम सीएए विरोध के नाम पर उपद्रव करने वालों को बेनकाब करेंगे, तो ये वो उपद्रवी चेहरे हैं, जिन्होंने प्रदेश की जनता को नुकसान पहुंचाया।

भीम आर्मी के अध्यक्ष चन्द्रशेखर ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती पर इशारे-इशारे में तंज कसा और कहा कि जो गलतियां हुई, उन्हें दोहराया नहीं जाएगा। बहुजन समाज के लिए काम करना पड़ेगा। केवल भाषणबाजी से दलितों का भविष्य नहीं सुधर सकता है।

मायावती ने ट्वीट किया "कांग्रेस के बाद अब भाजपा व इनकी केंद्र सरकार के अनवरत उपेक्षित रवैये के कारण यहां सदियों से पछाड़े गए एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग के शोषितों-पीड़ितों को आरक्षण के माध्यम से देश की मुख्यधारा में लाने का सकारात्मक संवैधानिक प्रयास फेल हो रहा है, जो अति गंभीर व दुर्भाग्यपूर्ण है।"

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार और दिल्ली की बदरपुर सीट से मौजूदा विधायक एनडी शर्मा ने गुरुवार को दावा किया कि उनपर कुछ अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया।

हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बैठक में शामिल होने से इंकार कर दिया है। इनके अलावा उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने भी बैठक में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। 

बसपा सुप्रीमो ने कहा, "कांग्रेस की नेता उत्तर प्रदेश में तो आए दिन यहां घड़ियालू आंसू बहाने आ जाती हैं। लेकिन राजस्थान में कल (शुक्रवार को) वह अपने निजी कार्यक्रम के दौरान अपना थोड़ा सा भी समय कोटा में उन बच्चों की मांओं के आंसू पोंछने के लिए निकालना उचित नहीं समझती हैं, जबकि वह भी एक मां हैं, यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण है।"

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की उत्तर प्रदेश में बढ़ रही सक्रियता समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को खटकने लगी है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के अलावा प्रदेश में हुई अन्य घटनाओं में प्रियंका ने न केवल बढ़चढ़ कर भाग लिया, बल्कि सपा बसपा को मात दे दी।

मध्य प्रदेश के दमोह में बीएसपी की विधायक ने नागरिकता कानून का समर्थन कर दिया। इसके बाद सरकार के भीतर हड़कंप मच गया।