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नई दिल्ली स्थित प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड ने अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ घोषणा की कि वह अपने सभी ग्राहकों या घर खरीददारों को बकाया राशि पर ब्याज नहीं लेगी।

संस्थापक चेयरमैन प्रदीप जैन के नेतृत्व में पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड 34 सालों के अनुभव के साथ देश के अग्रणी रियल एस्टेट एवं इंफ्रास्ट्रक्टर कंपनियों में से एक बन चुका है। देश के 14 सूबों के कुल 39 शहरों में इसकी मौजूदगी है।

पार्श्वनाथ समूह ने सन् 1984 में रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रवेश किया था। प्रदीप जैन ने यह कंपनी निचले स्तर से शुरू की और इसे सिर्फ तीन दशकों में एक विशाल रूप दे दिया। यह उनके मार्गदर्शन और दूरदर्शी सोच की वजह से हुआ कि कंपनी ने भारत की तरक्की के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा और भविष्य में बहुत से ऐसे अध्याय जोड़ने की तैयारी है।

आदित्य एस्टेट्स की कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स ने पहले ही अदाणी के 400 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है। इसमें 265 करोड़ रुपये की अग्रिम भुगतान शामिल है।

डीडीए फ्लैट्स हमेशा से ही आम लोगों का सपना रहा है। पिछले दो दशकों में दिल्ली डेवलेपमेंट अथॉरिटी (DDA) के फ्लैट्स हमेशा ही महंगे ही होते रहे हैं और अब डीडीए अपने इतिहास के सबसे महंगे फ्लैट बनाने जा रही है। बताया जा रहा है कि इसके तहत हर फ्लैट की कीमत तीन करोड़ रुपये के करीब होगी।

दिल्ली डेवलेपमेंट अथॉरिटी (DDA) के फ्लैट्स खरीदने का अच्छा मौका है। आमतौर पर डीडीए फ्लैट्स खरीदना काफी महंगा होता है लेकिन इस बार डीडीए अपने फ्लैट्स में डिस्काउंट दे रही है। प्राधिकरण ने फैसला किया है कि नहीं बिक पाए कुछ फ्लैट्स की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत का बंपर छूट दिया जाएगा।

सूत्रों की मानें तो प्रॉपर्टी की धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार अब 30 साल तक पुरानी प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन डिजिटल करेगी, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज ऑनलाइन देखे जा सकेंगे। इसमें सभी तरह के लैंड रिकॉर्ड के लिए पोर्टल बनेगा।

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (पीएमएवाई-जी) के तहत अब तक 88 लाख से ज्यादा मकानों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बुधवार को करीब 3.31 लाख और आवास के निर्माण को मंजूरी दी।